MP में लिवर ट्रांसप्लांट सुविधा के बावजूद बाहर जा रहे मरीज, अंगदान की कमी और जागरूकता का अभाव बड़ी वजह
मध्य प्रदेश में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के बावजूद लिवर ट्रांसप्लांट के लिए बड़ी संख्या में मरीज आज भी दिल्ली, चेन्नई और मुंबई जैसे महानगरों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश में लिवर प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों को बाहर जाने की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह डोनर अंगदान की कमजोर व्यवस्था और लोगों में जागरूकता की कमी है।
चिकित्सकों का कहना है कि लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर ट्रांसप्लांट जीवन बचाने वाला उपचार साबित हो सकता है। लेकिन अंगदान की कमी के कारण कई मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में वे बेहतर और जल्द इलाज की उम्मीद में दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों का रुख करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में लिवर ट्रांसप्लांट की क्षमता मौजूद है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त संख्या में डोनर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान को लेकर लोगों में अभी भी कई तरह की भ्रांतियां हैं, जिसके कारण जरूरतमंद मरीजों तक समय पर अंग नहीं पहुंच पाते।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि प्रदेश में अंगदान को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए और लोगों को इसके महत्व के बारे में जानकारी दी जाए तो स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसके अलावा सरकार की ओर से आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाने की जरूरत भी बताई जा रही है, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को महंगे इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
लिवर ट्रांसप्लांट एक जटिल और महंगी चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें अस्पताल, जांच, दवाओं और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल पर काफी खर्च आता है। ऐसे में आर्थिक सहायता योजनाओं का विस्तार होने से अधिक संख्या में मरीज प्रदेश में ही इलाज करा सकेंगे।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान की मजबूत व्यवस्था विकसित होने से न केवल मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भी और मजबूत होगी। इसके लिए अस्पतालों, सरकार और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
फिलहाल चुनौती यह है कि सुविधा होने के बाद भी मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंगदान की गति बढ़ाई जाए और सरकारी सहयोग को मजबूत किया जाए तो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है और हजारों मरीजों को अपने ही प्रदेश में कम खर्च में बेहतर इलाज मिल सकेगा।

