मध्यप्रदेश में ई-टोकन बंद होते ही खाद की मांग में 9 गुना तक उछाल, 15 जिलों में अचानक बढ़ा उठाव; कलेक्टरों से कराई गई जांच
मध्यप्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। किसान आंदोलन के बाद अगस्त में सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था बंद कर दी थी। इसके बाद प्रदेश के 15 जिलों में अचानक खाद उठाव में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुछ जिलों में खाद का उठाव सामान्य दिनों की तुलना में 9 गुना तक अधिक हो गया। इस असामान्य बढ़ोतरी ने कृषि विभाग के अधिकारियों का ध्यान खींचा है। मामला सामने आने के बाद मध्यप्रदेश किसान कल्याण एवं कृषि विभाग ने सभी 15 जिलों के कलेक्टरों से जांच कराई है।
दरअसल, प्रदेश में किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। इसके माध्यम से खाद वितरण को व्यवस्थित करने और किसानों तक जरूरत के मुताबिक खाद पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, किसान आंदोलन के बाद अगस्त में इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया। इसके बाद खाद वितरण की प्रक्रिया में बदलाव हुआ और किसानों को खाद उठाने के लिए पहले की तरह ई-टोकन की अनिवार्यता नहीं रही।
ई-टोकन बंद होते ही बढ़ा खाद का उठाव
ई-टोकन व्यवस्था बंद होने के बाद प्रदेश के 15 जिलों में खाद उठाव के आंकड़ों में अचानक असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। कुछ जिलों में खाद की मांग और उठाव में 9 गुना तक बढ़ोतरी सामने आई। इतनी बड़ी वृद्धि को सामान्य स्थिति नहीं माना गया। इसके बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन आंकड़ों का संज्ञान लिया और पूरे मामले की पड़ताल शुरू कराई।
विभागीय अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि ई-टोकन बंद होने के बाद आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खाद का उठाव कैसे हो गया। क्या वास्तव में किसानों को इतनी अधिक खाद की जरूरत थी या वितरण व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी हुई? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच कराने का निर्णय लिया गया।
15 जिलों के कलेक्टरों से कराई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश किसान कल्याण एवं कृषि विभाग ने संबंधित सभी 15 जिलों के कलेक्टरों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। जांच का उद्देश्य खाद उठाव में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारणों का पता लगाना था। साथ ही यह भी देखना था कि खाद का वितरण नियमानुसार हुआ या नहीं।
जिला स्तर पर जांच के जरिए खाद वितरण से जुड़े आंकड़ों और वास्तविक उठाव की स्थिति का परीक्षण कराया गया। इससे यह पता लगाने की कोशिश की गई कि बढ़े हुए खाद उठाव के पीछे किसानों की वास्तविक जरूरत थी या वितरण प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई।
खाद वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ई-टोकन व्यवस्था बंद होने के बाद अचानक खाद उठाव में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होना विभाग के लिए जांच का विषय बन गया है।
हालांकि, जांच में क्या निष्कर्ष सामने आए और किन जिलों में कितनी मात्रा में खाद का अतिरिक्त उठाव हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल विभाग का ध्यान खाद वितरण के आंकड़ों की जांच और असामान्य बढ़ोतरी के कारणों का पता लगाने पर है।

