बेटियों को दान दी जमीन पर 2 करोड़ का लोन, बिल्डर जीशान अली और पत्नी पर FIR; बैंक से मामला छिपाने के लिए बेटियों से ही कराया केस
बेटियों को दान में दी गई जमीन पर करीब 2 करोड़ रुपये का लोन लेने के मामले में बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि जमीन दान किए जाने के बाद भी उस पर बैंक से कर्ज लिया गया। मामले में बैंक से वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए बेटियों के जरिए ही केस करवाने का आरोप भी सामने आया है।
मामले में जमीन के स्वामित्व, दान की प्रक्रिया और बैंक से लिए गए कर्ज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोपों के मुताबिक, जिस जमीन को बेटियों के नाम दान किया गया था, उसी जमीन पर करीब 2 करोड़ रुपये का लोन लिया गया। इस मामले में बिल्डर और उनकी पत्नी की भूमिका की जांच की जा रही है।
दान की गई जमीन पर लोन लेने का आरोप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जमीन बेटियों को दान किए जाने के बाद उस पर बैंक से कर्ज लेने का मामला सामने आया। ऐसे मामलों में दान से संबंधित दस्तावेज, जमीन के रिकॉर्ड और बैंक के पास जमा कराए गए कागजात की जांच महत्वपूर्ण होती है। जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि जमीन के स्वामित्व की स्थिति क्या थी और लोन लेते समय बैंक को कौन-सी जानकारी दी गई थी।
बिल्डर और पत्नी के खिलाफ एफआईआर
मामले में बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर सकती है।
बैंक से जानकारी छिपाने का भी आरोप
मामले में यह आरोप भी लगाया गया है कि बैंक से वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए बेटियों के जरिए ही केस करवाया गया। हालांकि, इस आरोप की विस्तृत परिस्थितियां और कथित मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किसने, कब और किन परिस्थितियों में केस दर्ज कराया तथा उसका बैंक के लोन से क्या संबंध था।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
करीब 2 करोड़ रुपये के लोन और जमीन के दान से जुड़े इस मामले में दस्तावेजी जांच अहम होगी। पुलिस जमीन के स्वामित्व, दानपत्र, बैंक के ऋण दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल, एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

