"पापा, किसी बात की चिंता मत करना..." बेटी की आखिरी बात याद कर छलका पिता का दर्द
"कल ही बात हुई थी। मुझसे बस इतना कहा था कि पापा किसी बात की चिंता मत करना, हम घर आ गए हैं।" यह कहते-कहते पिता की आंखें भर आती हैं। बेटी की याद में डूबे पिता बार-बार उसकी आखिरी बातचीत को याद कर भावुक हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी का पुलिस विभाग में चयन हुआ था, तब पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। बेटी के चेहरे पर नौकरी को लेकर अलग ही उत्साह था। पिता उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, "जब उसका पुलिस में सिलेक्शन हुआ था, तब भी वह पूरी लगन से अपना काम कर रही थी। यहां झाड़ू लगा रही थी। मैंने कहा था, बेटा ये सब मत करो, चलो घर।"
पिता के मुताबिक, बेटी ने उस समय मुस्कुराते हुए जवाब दिया था, "नहीं पापा, नौकरी तो करूंगी।" उसके शब्दों में आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा साफ दिखाई देता था।
आज वही शब्द परिवार की यादों में गूंज रहे हैं। बेटी की मेहनत, संघर्ष और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण को याद कर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता कहते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर हमेशा गर्व रहेगा, क्योंकि उसने हर परिस्थिति में हिम्मत और जिम्मेदारी का परिचय दिया।
परिवार के लिए बेटी की आखिरी बात अब एक ऐसी अमिट स्मृति बन गई है, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। "पापा, किसी बात की चिंता मत करना..." यह वाक्य आज भी पिता के कानों में गूंज रहा है और उन्हें बार-बार भावुक कर रहा है।

