MP के वरिष्ठ CA अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ की साइबर ठगी: देश की जांच एजेंसियां भी हैरान, बड़े नेटवर्क की आशंका
मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई करोड़ों रुपये की साइबर ठगी ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। इस मामले में ठगी की रकम करीब 21 करोड़ 6 लाख रुपए बताई जा रही है।
इतनी बड़ी रकम की साइबर ठगी सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस वारदात के पीछे एक संगठित साइबर अपराध गिरोह काम कर सकता है।
लंबे समय तक बनाया गया भरोसा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने पीड़ित को अपने जाल में फंसाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया। ठगों ने पहले विश्वास कायम किया और फिर अलग-अलग तरीकों से संपर्क कर बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने किस तरीके से पीड़ित तक पहुंच बनाई और इतनी बड़ी राशि को कहां-कहां भेजा गया।
देशभर की एजेंसियों की नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर विशेषज्ञ और जांच एजेंसियां इसकी पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी रकम की ठगी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है, क्योंकि आमतौर पर साइबर अपराधों में इतनी बड़ी राशि का लेन-देन दुर्लभ माना जाता है।
बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे
जांच टीमों ने बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही ठगी में शामिल लोगों की पहचान और उनके नेटवर्क तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
लोगों को सतर्क रहने की अपील
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी भरोसा जीतकर लोगों को निवेश, सुरक्षा जांच या अन्य बहाने से अपने जाल में फंसाते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बड़ी रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
फिलहाल अशोक विजयवर्गीय से हुई इस बड़ी साइबर ठगी की जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस वारदात के पीछे कौन लोग हैं और इतने बड़े साइबर नेटवर्क को कैसे संचालित किया जा रहा था।

