भिंड में मेडिकल संचालक के दो बैंक खातों से 14.63 लाख की साइबर ठगी, तीन दिन में निकाली रकम
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के दबोह नगर में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां मेडिकल संचालक रविन्द्र सिंह चावला के यूको बैंक के दो खातों से तीन दिन के भीतर 14 लाख 63 हजार 70 रुपए 80 पैसे निकाल लिए गए। खातों से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अज्ञात व्यक्ति ने एक खाते से 12 लाख रुपए से अधिक और दूसरे खाते से करीब 2.63 लाख रुपए निकाले।
तीन दिन में खातों से निकली लाखों की रकम
जानकारी के अनुसार, दबोह नगर के मेडिकल संचालक रविन्द्र सिंह चावला के यूको बैंक में दो खाते हैं। इन दोनों खातों से तीन दिन के भीतर कुल 14,63,070 रुपए 80 पैसे निकाले जाने का मामला सामने आया है। एक खाते से 12 लाख रुपए से अधिक की रकम निकली, जबकि दूसरे खाते से लगभग 2 लाख 63 हजार रुपए निकाले गए।
इतनी बड़ी रकम कम समय में निकलने से बैंकिंग सुरक्षा और साइबर ठगी के तरीकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि ठगी किस माध्यम से की गई। यह भी पता नहीं चला है कि आरोपियों ने ऑनलाइन बैंकिंग, ओटीपी, एटीएम या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया था।
अज्ञात व्यक्ति पर ठगी का संदेह
इस मामले में अज्ञात व्यक्ति द्वारा रकम निकाले जाने की बात सामने आई है। ठगी कैसे हुई और इसमें कौन शामिल है, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। मामले में बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड और संबंधित डिजिटल जानकारी अहम हो सकती है।
फिलहाल, उपलब्ध विवरण में पुलिस शिकायत, एफआईआर और बैंक की ओर से की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं है। जांच की स्थिति और रकम वापस मिलने की संभावना को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क
बैंक खातों से अनधिकृत लेनदेन होने पर तुरंत बैंक को सूचना देना और खाते को सुरक्षित कराने के लिए जरूरी कदम उठाना चाहिए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
भिंड के दबोह में सामने आया यह मामला एक बार फिर बताता है कि बैंक खातों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। अब इस मामले में जांच के जरिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि रविन्द्र सिंह चावला के दोनों खातों से रकम किस तरह निकाली गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

