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फ्री स्कूटी योजना और नमो हरित परियोजना पर संकट! हिसाब नहीं दिया तो रुक सकती है 11 हजार करोड़ की राशि

फ्री स्कूटी योजना और नमो हरित परियोजना पर संकट! हिसाब नहीं दिया तो रुक सकती है 11 हजार करोड़ की राशि

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर अब वित्तीय अनुशासन का दबाव बढ़ गया है। ‘फ्री स्कूटी योजना’, ‘नमो हरित परियोजना’ और 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत स्थानीय निकायों को मिलने वाली करीब 11 हजार करोड़ रुपये की राशि का समय पर हिसाब नहीं देने पर इन योजनाओं के संचालन पर संकट खड़ा हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, सरकार ने स्थानीय निकायों को विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। अगले पांच वर्षों में 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत मिलने वाली इस राशि का उपयोग नगरीय निकायों और पंचायतों के विकास कार्यों में किया जाना है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि निकाय समय पर खर्च का विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें।

अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में राशि के उपयोग का हिसाब नहीं दिया गया तो आगे मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रभावित हो सकती है। इससे न केवल विकास कार्यों पर असर पड़ेगा, बल्कि सरकार की प्रमुख योजनाओं के संचालन में भी परेशानी आ सकती है।

‘फ्री स्कूटी योजना’ सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसके तहत पात्र विद्यार्थियों को स्कूटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ‘नमो हरित परियोजना’ के जरिए पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है।

सरकार ने स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे योजनाओं के तहत मिली राशि का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखें और समय पर संबंधित विभागों को रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने और योजनाओं को लगातार जारी रखने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है।

वित्त विभाग की ओर से भी इस मामले में सख्ती बरतने की तैयारी है। जिन निकायों द्वारा समय पर रिपोर्ट नहीं दी जाएगी, उनकी फंडिंग की समीक्षा की जा सकती है। इससे लापरवाही करने वाले निकायों पर सीधा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी योजनाओं के लिए केवल बजट आवंटन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका सही उपयोग और निगरानी भी जरूरी होती है। यदि स्थानीय निकाय समय पर वित्तीय विवरण प्रस्तुत नहीं करते हैं तो भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।

अब सभी की नजर स्थानीय निकायों की ओर है कि वे सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए समय पर हिसाब-किताब प्रस्तुत करते हैं या नहीं। क्योंकि 11 हजार करोड़ रुपये की यह राशि प्रदेश के शहरी और ग्रामीण विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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