जमीन धोखाधड़ी पर सख्ती बेअसर: चार बड़े अभियानों के बाद भी नहीं रुके भूमाफिया, सहकारी संस्थाओं की जांच और एफआईआर के बावजूद जारी खेल
शहर में जमीन के सौदों में धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन की सख्ती और भूमाफियाओं के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों के बावजूद जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। जमीनों की हेराफेरी, फर्जी दस्तावेज और अवैध कब्जों के मामलों में कार्रवाई तो हुई, लेकिन इसके बाद भी भूमाफियाओं का नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है।
प्रशासन ने भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए पिछले वर्षों में चार बड़े विशेष अभियान चलाए। वर्ष 2012, 2016, 2021 और 2023 में चलाए गए इन अभियानों के दौरान जमीनों से जुड़े मामलों की जांच की गई। सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों को खंगाला गया और कई मामलों में अनियमितताएं सामने आईं।
इन अभियानों में कई भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं। कुछ मामलों में गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए गए। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत अवैध तरीके से जमीनों की खरीद-फरोख्त करने वालों पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद जमीनों के सौदों में धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
शहर में जमीन खरीदने वाले आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट या जमीन खरीदी, लेकिन बाद में पता चला कि दस्तावेजों में गड़बड़ी है या जमीन किसी विवाद में फंसी हुई है। फर्जी रजिस्ट्री, एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने और सहकारी संस्थाओं के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामले सामने आते रहे हैं।
प्रशासन की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर भूमाफियाओं की पहचान और कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि केवल कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जमीनों के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सख्ती और पुराने विवादित मामलों का तेजी से निपटारा जरूरी है।
अधिकारियों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर जांच की जाती है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। वहीं, आम लोगों को भी जमीन खरीदने से पहले दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड सत्यापन कराने की सलाह दी जा रही है।
लगातार चल रही कार्रवाई के बावजूद भूमाफियाओं पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं लग पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि भविष्य में होने वाली कार्रवाई और नई रणनीति से जमीन धोखाधड़ी के मामलों पर कितना प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

