जेवर गिरवी रखे, 22 लाख रुपए दिए फिर भी नहीं छोड़ा: दंपती को 96 दिन डिजिटल अरेस्ट, ठग बोले- तुम्हारे नाम अरेस्ट वारंट
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक दंपती को करीब 96 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। आरोपियों ने दंपती को डराया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और उनकी संपत्ति सीज कर दी जाएगी। ठगों के झांसे में आकर दंपती ने अपने जेवर तक गिरवी रख दिए और करीब 22 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बावजूद ठगों ने उन्हें परेशान करना बंद नहीं किया।
बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने दंपती से संपर्क कर खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने उन्हें गंभीर मामले में फंसने और गिरफ्तारी होने का डर दिखाया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी रखने और किसी से संपर्क नहीं करने के निर्देश दिए गए।
ठगों ने दंपती से कहा कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। अगर उन्होंने कथित जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी संपत्ति भी सीज कर दी जाएगी। डर के कारण दंपती आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे।
आरोपियों ने कथित तौर पर दंपती से पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। लगातार दबाव बनाए जाने के बाद दंपती ने अपने पास उपलब्ध रकम देने के साथ ही जेवर गिरवी रखकर पैसे जुटाए। इस तरह ठगों को करीब 22 लाख रुपए दे दिए गए।
इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी जब ठगों ने उनसे संपर्क करना बंद नहीं किया और लगातार नए बहाने बनाकर पैसे की मांग जारी रखी, तब दंपती को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद साइबर ठगी की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां पैसों के लेनदेन, बैंक खातों और आरोपियों के मोबाइल नंबरों से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दंपती को ठगने वाले आरोपी किसी बड़े साइबर गिरोह से जुड़े हैं या नहीं।
साइबर पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी पीड़ित को गिरफ्तारी, केस, वारंट और संपत्ति जब्त होने का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर लगातार संपर्क बनाए रखकर पीड़ित को मानसिक दबाव में रखा जाता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर पैसे मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में डरने के बजाय कॉल काटकर संबंधित एजेंसी के आधिकारिक नंबर या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।
96 दिनों तक मानसिक दबाव और 22 लाख रुपए गंवाने के बाद दंपती ने पुलिस की मदद ली है। अब जांच एजेंसियां ठगी की रकम की ट्रेल और आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हैं। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी भी सामने आ सकती है।

