धार की भोजशाला में एएसआई सर्वे पर विवाद गहराया, मुस्लिम समाज ने निष्कर्षों को नकारा; हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा कराए गए सर्वे की रिपोर्ट पर मुस्लिम समाज ने कड़ा एतराज जताया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने सर्वे के उन निष्कर्षों को खारिज कर दिया है, जिनमें मस्जिद के निर्माण में मंदिर के अवशेषों के उपयोग का उल्लेख किया गया है।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सर्वे की रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसमें ऐतिहासिक साक्ष्यों की एकतरफा व्याख्या की गई है। समुदाय के नेताओं ने कहा कि वे इस सर्वे को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और इसके लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उनका आरोप है कि रिपोर्ट से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और इसलिए न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
दूसरी ओर, कुछ हिंदू संगठनों ने एएसआई की रिपोर्ट का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सर्वे से ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश पड़ा है और लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने में मदद मिल सकती है। हालांकि प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है।
भोजशाला परिसर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के कारण चर्चा में रहा है। यहां हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। इसी पृष्ठभूमि में एएसआई को संरचनात्मक और पुरातात्विक सर्वे का जिम्मा सौंपा गया था।
सूत्रों के अनुसार, सर्वे में परिसर की दीवारों, स्तंभों और संरचनात्मक अवशेषों का तकनीकी अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में कुछ स्थापत्य तत्वों को मंदिर शैली से संबंधित बताया गया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे जल्द ही विस्तृत आपत्ति दाखिल करेंगे और अदालत से सर्वे रिपोर्ट पर रोक या पुनः परीक्षण की मांग करेंगे। उनका दावा है कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और हालात पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल सभी की निगाहें हाईकोर्ट में संभावित याचिका पर टिकी हैं, जहां इस विवाद की अगली कानूनी दिशा तय हो सकती है।

