E-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं में बढ़ी चिंता, 79 दिनों में सामने आए साइड इफेक्ट्स के आरोप
1 अप्रैल 2026 से पहले देशभर सहित जिले में E-10 पेट्रोल की आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अब यह बदलकर E-20 पेट्रोल हो गया है। नए फ्यूल में 80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल का मिश्रण शामिल है। जिले में संचालित 175 पेट्रोल पंपों पर इसकी नियमित बिक्री की जा रही है। हालांकि, पिछले 79 दिनों में इसके प्रभाव को लेकर उपभोक्ताओं के बीच चिंता और चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद कई गाड़ियों में माइलेज कम होने, इंजन की आवाज बदलने और स्टार्टिंग में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि पुरानी गाड़ियों में यह ईंधन पूरी तरह अनुकूल नहीं बैठ रहा, जिससे परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है।
हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर्यावरण की दृष्टि से फायदेमंद है, क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है। लेकिन वे यह भी स्वीकार करते हैं कि पुराने इंजन वाले वाहनों में इसके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, उन्हें तेल कंपनियों की ओर से जो ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है, वह सरकारी मानकों के अनुरूप है और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। वहीं, उपभोक्ताओं का कहना है कि इस बदलाव के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन नहीं दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि E-20 ईंधन का असर वाहन की उम्र, इंजन तकनीक और मेंटेनेंस पर निर्भर करता है। नई तकनीक वाली गाड़ियों में इसका असर कम देखा जा रहा है, जबकि पुराने मॉडल में कुछ दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
फिलहाल जिले में E-20 पेट्रोल को लेकर असंतोष और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं। लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से स्पष्ट जानकारी, जागरूकता अभियान और तकनीकी गाइडलाइन जारी करने की मांग की है, ताकि उपभोक्ताओं की शंकाओं का समाधान हो सके और स्थिति स्पष्ट हो सके।

