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CJI सूर्यकांत बोले- विवादों का समाधान समझौते से करना हमारी परंपरा में शामिल, मिडिएशन भारत की जड़ों में है

CJI सूर्यकांत बोले- विवादों का समाधान समझौते से करना हमारी परंपरा में शामिल, मिडिएशन भारत की जड़ों में है

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि आपसी विवादों को समझौते और मिडिएशन (मध्यस्थता) के जरिए सुलझाने की परंपरा भारत की संस्कृति और मूल्यों में गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि मिडिएशन कानून बनने से पहले भी भारतीय समाज में विवादों के समाधान का यह तरीका मौजूद रहा है।

सीजेआई सूर्यकांत ने ये बातें जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ देशों के मिडिएशन सेमिनार के दूसरे दिन के सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।

मिडिएशन हमारी सामाजिक परंपरा का हिस्सा

सीजेआई ने कहा कि समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करना हमारी सत्यता और सामाजिक व्यवस्था की जड़ों में शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय से बातचीत और आपसी सहमति के जरिए विवादों को खत्म करने की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि मिडिएशन केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज में सहयोग, विश्वास और संवाद की भावना को मजबूत करता है।

महात्मा गांधी के अनुभव का किया जिक्र

सीजेआई सूर्यकांत ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के वकालत जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अपने वकालत करियर के सबसे संतोषजनक अनुभवों में से एक दो पक्षों के बीच आपसी समझौता कराने और विवाद खत्म करने में मदद करने को बताया था।

उन्होंने कहा कि गांधीजी का मानना था कि किसी मुकदमे को जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्षों के बीच संबंधों को बचाते हुए समाधान निकाला जाए।

मिडिएशन कानून से पहले भी रही परंपरा

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत में मिडिएशन की अवधारणा नई नहीं है। कानून बनने से पहले भी यह व्यवस्था समाज का हिस्सा रही है और लोग आपसी बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था में मिडिएशन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने में भी मदद मिलती है।

कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल

जयपुर में आयोजित इस सेमिनार में कॉमनवेल्थ देशों के न्यायविदों, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मिडिएशन व्यवस्था को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके उपयोग और न्याय प्रक्रिया में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।

सीजेआई ने कहा कि भविष्य में विवाद समाधान के इस माध्यम को और प्रभावी बनाने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है।

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