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केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का 'चिता आंदोलन' सातवें दिन भी जारी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर अड़े विस्थापित

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का 'चिता आंदोलन' सातवें दिन भी जारी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर अड़े विस्थापित

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांय, रूंझ, नेगुवा और अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। गुरुवार को आंदोलन का सातवां दिन रहा। प्रभावित परिवार अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 'चिता आंदोलन' के माध्यम से प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

आंदोलनकारी परिवारों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण उन्हें अपने घर और जमीन छोड़नी पड़ रही है, लेकिन उन्हें अब तक उचित मुआवजा और संतोषजनक पुनर्वास नहीं मिला है। उनका आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा, वैकल्पिक भूमि और मूलभूत सुविधाओं से युक्त पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

'चिता आंदोलन' के जरिए विस्थापित परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंता और असंतोष जाहिर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के साथ प्रभावित लोगों के अधिकारों और सम्मानजनक पुनर्वास को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों से लगातार संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की मांगों और समस्याओं पर नियमानुसार विचार किया जा रहा है तथा समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, आंदोलनकारी लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसके तहत कई गांव और क्षेत्र परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं, जिसके कारण पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है।

फिलहाल आंदोलन सातवें दिन भी जारी है और प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

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