भोजशाला में बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव, “राजा भोज ने रचा भारत के गौरवशाली इतिहास का स्वर्णिम अध्याय”
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने धार स्थित Bhojshala Temple में पूजा-अर्चना के दौरान भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और राजा भोज के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग यदि किसी शासक ने बनवाया, तो वह राजा भोज थे। उन्होंने कहा कि राजा भोज केवल एक महान शासक ही नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य और जल प्रबंधन के अद्भुत संरक्षक भी थे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजा भोज ने विकास और प्रकृति संरक्षण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने किसी नदी की मुख्यधारा को रोकने के बजाय विशाल भोपाल तालाब का निर्माण कराया। यह उनकी दूरदृष्टि और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील सोच को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी Upper Lake यानी भोपाल तालाब प्रदेश की पहचान बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि राजा भोज का शासनकाल भारतीय इतिहास के सबसे समृद्ध सांस्कृतिक दौरों में गिना जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजा भोज साहित्य और कला के बड़े संरक्षक थे। उनके दरबार में कवि सम्मेलन आयोजित किए जाते थे और श्रेष्ठ कवियों को सम्मान स्वरूप एक-एक सोने की ईंट भेंट की जाती थी। उन्होंने कहा कि यह हमारी उस गौरवशाली परंपरा का प्रमाण है, जहां ज्ञान, साहित्य और कला को सर्वोच्च स्थान दिया जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और समाज निर्माण की समृद्ध विरासत भी है। उन्होंने कहा कि राजा भोज जैसे महान शासकों ने भारत को विश्व में सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान दिलाई।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपनी सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास पर गर्व करने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास और महान शासकों के योगदान के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।
भोजशाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान लोगों ने राजा भोज के योगदान का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में धार्मिक वातावरण के बीच वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना भी की गई।
राजनीतिक और सांस्कृतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को प्रमुखता दे रहे हैं। भोजशाला में दिया गया उनका यह बयान भी भारतीय इतिहास और सनातन संस्कृति के गौरव को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री के भोजशाला दौरे और राजा भोज को लेकर दिए गए बयान की चर्चा राजनीतिक और सामाजिक हलकों में लगातार जारी है।

