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कैंसर मरीजों पर बढ़ा इलाज का बोझ, सस्ती कीमोथेरेपी दवा सिस्प्लाटिन की कमी से महंगी दवा का सहारा

कैंसर मरीजों पर बढ़ा इलाज का बोझ, सस्ती कीमोथेरेपी दवा सिस्प्लाटिन की कमी से महंगी दवा का सहारा

कैंसर के इलाज में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली सस्ती कीमोथेरेपी दवा सिस्प्लाटिन (Cisplatin) की बाजार में कमी अब मरीजों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है। दवा की उपलब्धता प्रभावित होने से कई अस्पतालों और कैंसर विशेषज्ञों को मरीजों के इलाज के लिए महंगी कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज के खर्च पर पड़ रहा है और कई परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, सिस्प्लाटिन लंबे समय से कई प्रकार के कैंसर के इलाज में पहली पसंद की दवा रही है। यह अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध होने के कारण बड़ी संख्या में मरीजों के लिए किफायती विकल्प मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से बाजार में इसकी आपूर्ति प्रभावित होने के कारण मरीजों और अस्पतालों को दवा हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दवा की कमी के चलते डॉक्टर कई मामलों में मरीजों को कार्बोप्लाटिन आधारित कीमोथेरेपी देने के लिए मजबूर हैं। हालांकि यह भी एक प्रभावी दवा है, लेकिन इसकी कीमत सिस्प्लाटिन की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में मरीजों का इलाज पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का इलाज पहले से ही लंबी और खर्चीली प्रक्रिया होती है। ऐसे में यदि दवाओं की कीमत बढ़ जाए या सस्ती दवाएं उपलब्ध न हों, तो इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ता है। कई मरीजों को इलाज जारी रखने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के अनुसार, सिस्प्लाटिन की सीमित उपलब्धता के कारण मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। कई जगहों पर मरीजों के परिजन एक शहर से दूसरे शहर तक दवा की तलाश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आसानी से दवा नहीं मिल पा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर कैंसर मरीजों के इलाज की निरंतरता और उनकी आर्थिक स्थिति दोनों पर पड़ सकता है।

मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि सिस्प्लाटिन की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य की जाए, ताकि मरीजों को समय पर किफायती इलाज मिल सके और उन्हें महंगी दवाओं का सहारा लेने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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