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'बेटे के लिए बाजार से पनीर लाया था, लेकिन वह घर लौट ही नहीं पाया': पिता का छलका दर्द, मातम में बदला परिवार का उपवास

एक पिता के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो कि जिस बेटे की पसंद का खाना बनवाने की तैयारी हो, वह उसे खाने के लिए कभी घर ही न लौटे। बेटे की मौत के बाद परिजनों का दर्द कुछ ऐसा ही है। पिता ने नम आंखों से उस आखिरी पल को याद करते हुए बताया कि उनका और उनकी पत्नी का पशुपतिनाथ का उपवास था।  उन्होंने कहा, "घर में उपवास होने की वजह से नॉनवेज नहीं बन रहा था। बेटे को पनीर बहुत पसंद था, इसलिए मैं खास तौर पर बाजार से उसके लिए पनीर खरीदकर लाया था। घर में उसकी पसंद की सब्जी बन रही थी। हमें उम्मीद थी कि वह लौटेगा और परिवार के साथ खाना खाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।"  पिता की यह बात सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जिस बेटे के लिए घर में उसकी पसंद का भोजन तैयार किया जा रहा था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर में जहां शाम को बेटे के आने का इंतजार था, वहीं कुछ ही देर बाद मातम का माहौल छा गया।  परिजनों का कहना है कि परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि यह उनकी बेटे से आखिरी मुलाकात होगी। उसकी पसंद का खाना आज भी घर में अधूरा पड़ा है, लेकिन उसे खाने वाला अब इस दुनिया में नहीं रहा।  घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार और आसपास के लोग लगातार परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन जवान बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। माता-पिता बार-बार उसकी यादों में खो जा रहे हैं और उसके साथ बिताए आखिरी पलों को याद कर भावुक हो रहे हैं।  यह घटना सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उन अनगिनत अधूरे सपनों और उम्मीदों की कहानी भी है, जो एक पल में बिखर गईं। जिस घर में बेटे के पसंदीदा खाने की खुशबू फैलने वाली थी, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। परिवार को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, वह अब कभी वापस नहीं आएगा।

एक पिता के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो कि जिस बेटे की पसंद का खाना बनवाने की तैयारी हो, वह उसे खाने के लिए कभी घर ही न लौटे। बेटे की मौत के बाद परिजनों का दर्द कुछ ऐसा ही है। पिता ने नम आंखों से उस आखिरी पल को याद करते हुए बताया कि उनका और उनकी पत्नी का पशुपतिनाथ का उपवास था।

उन्होंने कहा, "घर में उपवास होने की वजह से नॉनवेज नहीं बन रहा था। बेटे को पनीर बहुत पसंद था, इसलिए मैं खास तौर पर बाजार से उसके लिए पनीर खरीदकर लाया था। घर में उसकी पसंद की सब्जी बन रही थी। हमें उम्मीद थी कि वह लौटेगा और परिवार के साथ खाना खाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।"

पिता की यह बात सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जिस बेटे के लिए घर में उसकी पसंद का भोजन तैयार किया जा रहा था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर में जहां शाम को बेटे के आने का इंतजार था, वहीं कुछ ही देर बाद मातम का माहौल छा गया।

परिजनों का कहना है कि परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि यह उनकी बेटे से आखिरी मुलाकात होगी। उसकी पसंद का खाना आज भी घर में अधूरा पड़ा है, लेकिन उसे खाने वाला अब इस दुनिया में नहीं रहा।

घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार और आसपास के लोग लगातार परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन जवान बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। माता-पिता बार-बार उसकी यादों में खो जा रहे हैं और उसके साथ बिताए आखिरी पलों को याद कर भावुक हो रहे हैं।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उन अनगिनत अधूरे सपनों और उम्मीदों की कहानी भी है, जो एक पल में बिखर गईं। जिस घर में बेटे के पसंदीदा खाने की खुशबू फैलने वाली थी, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। परिवार को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, वह अब कभी वापस नहीं आएगा।

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