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रिश्वत का शपथ-पत्र...: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मंगलसूत्र तक गिरवी रखा, फोन-पे पर दी घूस

राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती और पदस्थापन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शपथ-पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनसे नौकरी दिलाने, पसंदीदा केंद्र पर नियुक्ति कराने और स्थानांतरण करवाने के नाम पर रिश्वत ली गई। आरोपों के अनुसार, कुछ महिलाओं ने पैसे जुटाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया, जबकि कई ने डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोन-पे के जरिए रकम ट्रांसफर की।  मामले ने तूल तब पकड़ा जब पीड़ित महिलाओं के शपथ-पत्र सार्वजनिक हुए। इनमें दावा किया गया है कि नौकरी और पदस्थापन के बदले हजारों से लेकर लाखों रुपए तक की मांग की गई थी। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद कर्ज लेकर और जेवर गिरवी रखकर रकम का इंतजाम किया।  शपथ-पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया है कि रिश्वत की राशि नकद के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी ली गई। कई महिलाओं ने फोन-पे और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भुगतान करने का दावा किया है। इससे मामले में डिजिटल ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।  पीड़ित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि पैसे देने के बाद उनकी नियुक्ति या स्थानांतरण की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाएगी। हालांकि, कई मामलों में कथित वादे पूरे नहीं हुए, जिसके बाद महिलाओं ने सामने आकर शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।  मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभाग और प्रशासन पर जांच का दबाव बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने भी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शोषण का भी उदाहरण है।  राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों और शपथ-पत्रों की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।  विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल भुगतान के दावों की पुष्टि हो जाती है, तो जांच एजेंसियों के लिए लेनदेन की कड़ियां जोड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। ऐसे में फोन-पे और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  फिलहाल, शपथ-पत्रों में लगाए गए आरोपों ने राज्य में आंगनबाड़ी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती और पदस्थापन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शपथ-पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनसे नौकरी दिलाने, पसंदीदा केंद्र पर नियुक्ति कराने और स्थानांतरण करवाने के नाम पर रिश्वत ली गई। आरोपों के अनुसार, कुछ महिलाओं ने पैसे जुटाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया, जबकि कई ने डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोन-पे के जरिए रकम ट्रांसफर की।

मामले ने तूल तब पकड़ा जब पीड़ित महिलाओं के शपथ-पत्र सार्वजनिक हुए। इनमें दावा किया गया है कि नौकरी और पदस्थापन के बदले हजारों से लेकर लाखों रुपए तक की मांग की गई थी। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद कर्ज लेकर और जेवर गिरवी रखकर रकम का इंतजाम किया।

शपथ-पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया है कि रिश्वत की राशि नकद के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी ली गई। कई महिलाओं ने फोन-पे और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भुगतान करने का दावा किया है। इससे मामले में डिजिटल ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

पीड़ित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि पैसे देने के बाद उनकी नियुक्ति या स्थानांतरण की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाएगी। हालांकि, कई मामलों में कथित वादे पूरे नहीं हुए, जिसके बाद महिलाओं ने सामने आकर शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।

मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभाग और प्रशासन पर जांच का दबाव बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने भी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शोषण का भी उदाहरण है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों और शपथ-पत्रों की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल भुगतान के दावों की पुष्टि हो जाती है, तो जांच एजेंसियों के लिए लेनदेन की कड़ियां जोड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। ऐसे में फोन-पे और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल, शपथ-पत्रों में लगाए गए आरोपों ने राज्य में आंगनबाड़ी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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