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फर्जी डीआईजी बनकर ठगी का बड़ा खुलासा, दतिया के सर्राफा कारोबारी से 10 महीने में वसूले 1.09 करोड़ रुपये

फर्जी डीआईजी बनकर ठगी का बड़ा खुलासा, दतिया के सर्राफा कारोबारी से 10 महीने में वसूले 1.09 करोड़ रुपये

मध्य प्रदेश के Datia में एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी वर्दी और झूठे सरकारी रौब के दम पर एक सर्राफा कारोबारी परिवार से भारी रकम ऐंठ ली गई। आरोप है कि एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उसके साथी ने खुद को डीआईजी बताकर पूरे परिवार को लंबे समय तक डर के जाल में फंसाए रखा और करीब 10 महीनों में कुल 1 करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपये वसूल लिए।

मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित परिवार पर झूठी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई का डर बनाया। फर्जी डीआईजी की वर्दी और दबंग अंदाज के कारण कारोबारी परिवार शुरुआत में इस धोखाधड़ी को समझ नहीं पाया और लगातार दबाव में आकर रकम देता रहा।

पीड़ित परिवार सर्राफा कारोबार से जुड़ा हुआ है और आरोपियों ने इसी व्यवसायिक पृष्ठभूमि का फायदा उठाते हुए डर और भ्रम का माहौल तैयार किया। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने अलग-अलग बहानों और धमकियों के जरिए धीरे-धीरे यह बड़ी रकम ऐंठी।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगी का यह खेल करीब 10 महीने तक चलता रहा, और इस दौरान पीड़ित परिवार मानसिक दबाव में रहा। आरोपियों ने खुद को कानून व्यवस्था से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति बताकर बार-बार धमकाया, जिससे परिवार ने लंबे समय तक शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटाई।

जब बाद में पीड़ित परिवार को संदेह हुआ और उन्होंने जांच-पड़ताल शुरू की, तो पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामला सामने आया।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और दोनों आरोपियों की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह साफ हो रहा है कि यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है, जिसमें फर्जी पहचान और डर का इस्तेमाल कर पैसे वसूले गए।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे फर्जी पहचान के दम पर अपराधी लंबे समय तक लोगों को ठगते रहते हैं और डर का माहौल बनाकर उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में लोगों को तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह से और लोग भी जुड़े हुए हैं।

कुल मिलाकर, दतिया का यह मामला ठगी और मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए की गई एक बड़ी धोखाधड़ी को उजागर करता है, जिसने एक कारोबारी परिवार को लंबे समय तक डर के साए में रखा और करोड़ों रुपये की चपत लगा दी।

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