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पुरानी पेंशन को लेकर शिक्षकों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, पिछली सेवा मान्य तो OPS से वंचित नहीं कर सकती सरकार

पुरानी पेंशन को लेकर शिक्षकों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, पिछली सेवा मान्य तो OPS से वंचित नहीं कर सकती सरकार

मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे शिक्षकों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सरकार शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को मान्य कर उन्हें क्रमोन्नति और वरिष्ठता का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत की इस टिप्पणी से उन शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जो लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षकों का तर्क रहा है कि उनकी पूर्व की सेवाओं को अन्य सेवा संबंधी लाभों के लिए स्वीकार किया जाता है, लेकिन पेंशन के मामले में उन्हें इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है।

पिछली सेवा को मान्यता देने का सवाल

हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को क्रमोन्नति और वरिष्ठता निर्धारित करने में मान्य किया जा रहा है, तो केवल पेंशन के मामले में उन्हें अलग नहीं रखा जा सकता।

इस टिप्पणी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि शिक्षकों की पेंशन पात्रता निर्धारित करने में उनकी पूर्व सेवाओं की गणना प्रमुख मुद्दा रही है। शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को मान्यता देने और पुरानी पेंशन का लाभ देने के बीच अंतर को लेकर विवाद सामने आता रहा है।

शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ीं

अदालत की टिप्पणी को पुरानी पेंशन की मांग कर रहे शिक्षकों के लिए अहम राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन कर्मचारियों को उम्मीद जगी है, जो अपनी पुरानी सेवाओं के आधार पर पेंशन लाभ की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, इस मामले में अंतिम आदेश, संबंधित शिक्षकों की पात्रता और सरकार को दिए गए निर्देशों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि हाई कोर्ट की टिप्पणी का लाभ किन शिक्षकों और किन परिस्थितियों में मिलेगा।

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