रेलवे फिजिकल टेस्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा: आधार में बदले थंब और फोटो, रेटिना स्कैन से पकड़े गए ‘मुन्नाभाई’
रेलवे भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। फिजिकल टेस्ट के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी पहचान छिपाकर परीक्षा देने की कोशिश की, लेकिन आधुनिक तकनीक के सामने उनकी चालाकी नहीं चल सकी। जांच के दौरान रेटिना स्कैन से असली और नकली अभ्यर्थियों की पहचान कर ली गई।जानकारी के मुताबिक, फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों ने पहचान बदलने के लिए आधार कार्ड में हेरफेर करने की कोशिश की थी। उन्होंने आधार में थंब इंप्रेशन और फोटो बदलने जैसी गड़बड़ी की थी, ताकि उनकी जगह दूसरे लोग फिजिकल टेस्ट दे सकें।
आधार में बदलाव कर दी थी पहचान छिपाने की कोशिश
रेलवे भर्ती के फिजिकल टेस्ट में शामिल होने पहुंचे कुछ अभ्यर्थियों पर अधिकारियों को संदेह हुआ। दस्तावेजों की जांच के दौरान उनकी पहचान को लेकर सवाल उठे।इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने बायोमेट्रिक जांच कराई। रेटिना स्कैन और अन्य तकनीकी जांच में सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों की पहचान दस्तावेजों से मेल नहीं खा रही थी।जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने आधार कार्ड में फोटो और अंगूठे के निशान में बदलाव कर फर्जी तरीके से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश की थी।
रेटिना स्कैन ने खोली पोल
फर्जीवाड़े को पकड़ने में रेटिना स्कैन तकनीक अहम साबित हुई। जहां सामान्य दस्तावेज जांच में हेरफेर पकड़ना मुश्किल था, वहीं आंखों की पहचान से असली उम्मीदवारों का पता चल गया।अधिकारियों के मुताबिक, आधुनिक बायोमेट्रिक सिस्टम की वजह से ऐसे मामलों में फर्जी उम्मीदवारों को पकड़ना आसान हो गया है।
‘मुन्नाभाई’ तरीके से नौकरी पाने की कोशिश
रेलवे भर्ती में दूसरे व्यक्ति को परीक्षा या शारीरिक दक्षता परीक्षा में बैठाने का यह तरीका नया नहीं है। इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां उम्मीदवार अपनी जगह किसी और को भेजकर चयन हासिल करने की कोशिश करते हैं।ऐसे लोगों को आम बोलचाल में ‘मुन्नाभाई’ कहा जाता है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
रेलवे अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। पकड़े गए संदिग्ध अभ्यर्थियों के खिलाफ जांचशुरू कर दी गई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है।अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए दस्तावेज सत्यापन के साथ-साथ बायोमेट्रिक और तकनीकी जांच को और मजबूत किया जा रहा है।इस घटना के बाद साफ है कि फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वालों पर अब आधुनिक तकनीक की नजर है।

