व्यापमं पुलिस SI भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के मामले में बड़ा फैसला, ग्वालियर की विशेष अदालत ने सुनाया निर्णय
वर्ष 2013 की व्यापमं पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी यानी सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिलाने के मामले में ग्वालियर स्थित सीजीएम की विशेष अदालत ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामला मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापमं भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों में शामिल रहा है।
आरोप था कि पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा देने के लिए बैठाया गया था। परीक्षा में इस तरह फर्जी परीक्षार्थी के शामिल होने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। जांच के बाद मामले में संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और प्रकरण अदालत तक पहुंचा।
2013 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला
यह मामला वर्ष 2013 में आयोजित पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का है। उस समय मध्य प्रदेश में व्यापमं के जरिए विभिन्न सरकारी पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं। पुलिस SI भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर एक अभ्यर्थी ने खुद परीक्षा देने के बजाय उसकी जगह दूसरे व्यक्ति को बैठाया था।
जांच के दौरान फर्जी परीक्षार्थी यानी सॉल्वर के जरिए परीक्षा दिलाने के आरोप सामने आए। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
अदालत में चली लंबी सुनवाई
मामले की सुनवाई ग्वालियर स्थित सीजीएम की विशेष अदालत में हुई। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। बचाव पक्ष ने भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
बुधवार को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। यह फैसला व्यापमं से जुड़े पुराने मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सॉल्वर गैंग पर उठे थे सवाल
व्यापमं की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में फर्जी परीक्षार्थी बैठाने और नकल कराने के आरोपों ने मध्य प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा किया था। ऐसे मामलों में वास्तविक अभ्यर्थी की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाने के लिए सॉल्वर का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा से जुड़ा यह मामला भी इसी तरह की कथित अनियमितता से संबंधित है। अदालत के फैसले के बाद मामले में दोष और सजा से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हुई है।

