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भोपाल में आवासीय प्लॉट पर चल रहे मॉल-होटलों पर हाईकोर्ट सख्त: व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति मांगी गई

भोपाल में आवासीय प्लॉट पर चल रहे मॉल-होटलों पर हाईकोर्ट सख्त: व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति मांगी गई

राजधानी के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित हो रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं कि यदि वे आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं तो उन्हें इसके लिए नियमानुसार अनुमति लेनी होगी।हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि भूमि उपयोग के नियमों का पालन करना जरूरी है। बिना अनुमति आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं।

आवासीय भूखंडों के उपयोग पर उठे सवाल

मामले में यह मुद्दा सामने आया कि भोपाल के कई रिहायशी क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित भूखंडों पर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं।इनमें मॉल, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक गतिविधियां शामिल हैं। इससे क्षेत्र के रहवासियों को ट्रैफिक, पार्किंग और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

कोर्ट ने मांगी नियमों के पालन की जानकारी

हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षकारों से कहा है कि वे यह स्पष्ट करें कि आवासीय भूखंडों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं।यदि किसी प्रतिष्ठान के पास अनुमति नहीं है तो उसे नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

शहर की व्यवस्था और रहवासियों की परेशानी

रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण बढ़ते यातायात, पार्किंग की समस्या और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं।रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों का स्वरूप बदलने से वहां रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।

आगे की सुनवाई में होगी स्थिति स्पष्ट

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग और प्रतिष्ठानों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कोर्ट आगे की सुनवाई में यह देखेगा कि नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।मामले में आने वाले दिनों में नगर नियोजन और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आने की संभावना है।

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