भोपाल-अमरावद खुर्द बिजली लाइन की क्षमता तीन गुना बढ़ेगी, HTLS तकनीक से अपग्रेडेशन शुरू
भोपाल-अमरावद खुर्द बिजली लाइन की ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने के लिए एचटीएलएस (HTLS) तकनीक से अपग्रेडेशन का काम शुरू किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से मौजूदा बिजली लाइन की क्षमता को बिना नई लाइन बिछाए लगभग तीन गुना तक बढ़ाने की योजना है। इससे बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिना नई लाइन बिछाए बढ़ेगी क्षमता
बिजली की मांग लगातार बढ़ने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। पारंपरिक तरीके से क्षमता बढ़ाने के लिए कई बार नई लाइन बिछाने या मौजूदा ढांचे में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं। वहीं, एचटीएलएस तकनीक के जरिए मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
इस तकनीक में उच्च तापमान पर काम करने वाले विशेष कंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। ये कंडक्टर पारंपरिक कंडक्टर की तुलना में अधिक तापमान सहन कर सकते हैं और उपयुक्त परिस्थितियों में ज्यादा बिजली का प्रवाह संभाल सकते हैं। इससे मौजूदा बिजली ढांचे का बेहतर उपयोग संभव होता है।
बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मिलेगी मदद
भोपाल-अमरावद खुर्द लाइन के अपग्रेडेशन से क्षेत्र में बिजली ट्रांसमिशन की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है। बिजली की मांग बढ़ने पर ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में लाइन की क्षमता बढ़ने से बिजली को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इस परियोजना का एक अहम फायदा यह है कि नई लाइन बिछाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे नए कॉरिडोर के लिए जमीन की जरूरत और निर्माण से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
तकनीक से मजबूत होगा ट्रांसमिशन नेटवर्क
एचटीएलएस तकनीक का इस्तेमाल मौजूदा बिजली ढांचे की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, लाइन की वास्तविक क्षमता में बढ़ोतरी कंडक्टर के प्रकार, तापमान, टावरों की स्थिति और अन्य तकनीकी मानकों पर निर्भर करती है।
भोपाल-अमरवद खुर्द लाइन पर अपग्रेडेशन का काम पूरा होने के बाद इसकी ट्रांसमिशन क्षमता में प्रस्तावित बढ़ोतरी का लाभ मिल सकेगा। इससे भविष्य में बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा नेटवर्क का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

