शहर को भिक्षुक मुक्त बनाने के अभियान के दौरान प्रशासन के सामने ऐसा मामला आया है जिसने व्यवस्था और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। सराफा बाजार में रेंगकर चलने वाला एक दिव्यांग व्यक्ति, जिसे लोग असहाय समझकर दान देते थे, वास्तव में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला है।
यह व्यक्ति मांगीलाल नाम से जाना जाता है। उसकी जांच के दौरान पता चला कि उसके पास न केवल शहर के विभिन्न हिस्सों में तीन मकान हैं, बल्कि एक लग्जरी कार और तीन ऑटो रिक्शा भी हैं। यह खुलासा प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए आश्चर्यजनक था, क्योंकि कई सालों तक लोग उसे आर्थिक रूप से कमजोर मानकर मदद करते आए थे।
स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अब वे मांगीलाल की आय के स्रोतों और संपत्तियों के कानूनी दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रहे हैं। अधिकारी यह पता लगाने में लगे हैं कि क्या यह संपत्ति कानूनी रूप से अर्जित की गई है या इसके पीछे किसी प्रकार की धोखाधड़ी या अवैध गतिविधि हुई है।
शहर के नागरिक इस मामले को सुनकर आश्चर्यचकित हैं। सराफा बाजार के दुकानदार रामेश्वर शर्मा ने कहा, “हमने उसे हमेशा मदद की, क्योंकि हमें लगता था कि वह असहाय है। अब यह जानकर हम चौंक गए हैं। प्रशासन को इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच करनी चाहिए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले यह दर्शाते हैं कि भिक्षुक अभियान केवल सतही जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आम तौर पर कई लोग वास्तविक स्थिति को छुपा कर दूसरों की सहानुभूति का फायदा उठाते हैं। प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में सटीक और कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाए।
मांगीलाल के मामले ने इंदौर प्रशासन को भी सावधान कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे शहर में भिक्षुकों की पहचान और उनकी वास्तविक स्थिति को निर्धारित करने के लिए सूची और दस्तावेजी जांच को और अधिक सख्त करेंगे। इसके अलावा, अभियान में शामिल कर्मचारियों को यह निर्देश दिया गया है कि किसी भी भिक्षुक की संपत्ति और आय के स्रोत की जानकारी जुटाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
इस बीच आम जनता में भी चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग पूछ रहे हैं कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और कितने लोगों के साथ इस तरह का धोखा हो सकता है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को भिक्षुक नीति और सार्वजनिक जागरूकता के सुधार का अवसर भी मान रहे हैं।
इस खुलासे के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल भिक्षुकों से सहायता छीनना नहीं है, बल्कि सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। इसी दिशा में अधिकारियों ने मांगीलाल की संपत्तियों और आय की जांच तेज कर दी है।
इंदौर में भिक्षुक मुक्त बनाने का यह अभियान अब केवल एक सामान्य अभियान नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की सामाजिक और आर्थिक पारदर्शिता को सुनिश्चित करने का भी माध्यम बन गया है। प्रशासन और जनता दोनों के लिए मांगीलाल का मामला एक चेतावनी की तरह है कि हमेशा सतही दृष्टि पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

