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NH-44 की बरकोटी घाटी बनी वन्यजीवों के लिए मौत की घाटी, तेंदुए की मौत और बाघ घायल; पहले 8 गायों की भी गई जान

NH-44 की बरकोटी घाटी बनी वन्यजीवों के लिए मौत की घाटी, तेंदुए की मौत और बाघ घायल; पहले 8 गायों की भी गई जान

राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) स्थित बरकोटी घाटी वन्यजीवों के लिए लगातार खतरनाक साबित हो रही है। यहां हाल ही में सड़क हादसे में एक तेंदुए की मौत हो गई, जबकि एक बाघ घायल हो गया। इससे पहले भी तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर से 7 से 8 गायों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे हादसों ने इस मार्ग पर वन्यजीवों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

बरकोटी घाटी का इलाका वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां से गुजरने वाले वाहनों की तेज रफ्तार जानवरों के लिए खतरा बन रही है। हालिया घटनाओं के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इस मार्ग पर पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं।

तेंदुए की मौत, बाघ भी हुआ घायल

हाल ही में बरकोटी घाटी में हुए हादसे में एक तेंदुए की जान चली गई। इसी क्षेत्र में एक बाघ के घायल होने की घटना भी सामने आई है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही के दौरान वन्यजीवों को गंभीर खतरा बना हुआ है।

वन्यजीवों के सड़क पार करने के दौरान तेज रफ्तार वाहन उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। खासकर जंगल और घाटी से गुजरने वाले मार्गों पर ऐसी घटनाओं की आशंका अधिक रहती है।

पहले ट्रक की टक्कर से 7-8 गायों की मौत

बरकोटी घाटी में वन्यजीवों के अलावा मवेशी भी सड़क हादसों का शिकार हो चुके हैं। पूर्व में यहां ट्रक की टक्कर से 7 से 8 गायों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी सड़क पर पशुओं की सुरक्षा और वाहनों की गति नियंत्रित करने को लेकर सवाल उठे थे।

लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि इस मार्ग पर केवल जंगली जानवर ही नहीं, बल्कि सड़क पर आने वाले मवेशियों की जान भी जोखिम में है।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इंतजाम जरूरी

NH-44 की बरकोटी घाटी में लगातार हो रहे हादसों के मद्देनजर सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर ध्यान देने की जरूरत है। वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील हिस्सों में चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण और अन्य सुरक्षा उपाय दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में मदद कर सकते हैं।

इसके साथ ही वन विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के बीच समन्वय भी जरूरी है, ताकि वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान कर उचित कदम उठाए जा सकें।

फिलहाल तेंदुए की मौत और बाघ के घायल होने की घटनाओं ने बरकोटी घाटी में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मार्ग पर हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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