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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में खोजी स्वानों की बढ़ेगी ताकत, वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए शुरू हुआ 7 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में खोजी स्वानों की बढ़ेगी ताकत, वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए शुरू हुआ 7 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई है। रिजर्व के जैव विविधता केंद्र में खोजी स्वानों (स्निफर डॉग्स) का सात दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स और वार्षिक समीक्षा कार्यक्रम शुरू हो गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य खोजी स्वान दलों की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाना, वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगाना तथा वन अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाना है।

खोजी स्वानों को मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान खोजी स्वानों और उनके हैंडलर्स को आधुनिक तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें वन्यजीवों के अंगों, खाल, हड्डियों और अन्य प्रतिबंधित वन उत्पादों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने तथा अपराध स्थलों पर साक्ष्य खोजने का अभ्यास कराया जाएगा।

विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में स्वानों की सूंघने की क्षमता, ट्रैकिंग स्किल और आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया का भी परीक्षण किया जाएगा।

वन अपराधों पर लगेगी लगाम

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खोजी स्वान दल वन्यजीव तस्करी, अवैध शिकार और जंगलों में होने वाले अन्य अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे अपराधियों तक तेजी से पहुंचने और साक्ष्य जुटाने में मदद मिलती है।

वार्षिक समीक्षा में होगा प्रदर्शन का आकलन

सात दिवसीय कार्यक्रम के दौरान खोजी स्वानों के पिछले एक वर्ष के प्रदर्शन की भी समीक्षा की जाएगी। विभिन्न टाइगर रिजर्व और वन मंडलों से आए स्वान दलों की उपलब्धियों, चुनौतियों और अनुभवों पर चर्चा होगी। साथ ही भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी ताकि वन्यजीव संरक्षण को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित खोजी स्वान वन्यजीव संरक्षण अभियान की मजबूत कड़ी हैं। उनकी मदद से न केवल वन अपराधों का तेजी से खुलासा होता है, बल्कि संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है।

वन विभाग का कहना है कि इस तरह के नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि खोजी स्वान दल आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और प्रदेश की जैव विविधता एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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