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स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप, बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में नाराजगी

स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप, बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में नाराजगी

सरकार की ओर से बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच एक PM श्री स्कूल में छात्रों से पानी भरवाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल में पानी की व्यवस्था के लिए बच्चों को ही जिम्मेदारी दी जा रही है। इतना ही नहीं, पानी लाने के लिए छात्रों को व्यस्त सड़क पार करने का जोखिम भी उठाना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार, स्कूल में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्र खुद पानी भरने के लिए जाते हैं। कई बार उन्हें स्कूल परिसर से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है। इस दौरान बच्चों को सड़क पार करनी पड़ती है, जिससे किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के लिए आने वाले बच्चों से इस तरह के काम करवाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों की प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षा ग्रहण करना है, न कि पानी भरना। स्कूल प्रशासन को छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि PM श्री योजना के तहत चयनित स्कूलों में बेहतर संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आ रही है। यदि स्कूल में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए बच्चों को बाहर जाना पड़ रहा है तो यह गंभीर लापरवाही है।

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने मांग की है कि विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और स्कूल में पानी सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति की जांच करें। साथ ही बच्चों को इस तरह के जोखिम भरे कार्यों से मुक्त कराया जाए।

वहीं, स्कूल प्रशासन की ओर से इस मामले में सफाई देते हुए व्यवस्थाओं को जल्द सुधारने की बात कही जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलना चाहिए। खासकर सरकारी योजनाओं के तहत विकसित किए जा रहे स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और छात्रों की सुरक्षा के लिए कितनी जल्दी व्यवस्था में सुधार किया जाता है।

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