जंगल पर अवैध कब्जे का आरोप: पेड़ काटकर जमीन की समतल, अब हो रही खेती; मुंबई-भोपाल की कंपनियों पर गंभीर सवाल
वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कटाई का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यारनगर और देलावाड़ी क्षेत्र के जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर जमीन को समतल किया गया और अब वहां खेती की जा रही है। इस पूरे मामले में मुंबई और भोपाल की कुछ कंपनियों के नाम सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पहले घना जंगल हुआ करता था, वहां अब बड़े हिस्से में जमीन को समतल कर कृषि गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया, जिससे वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। मामले के सामने आने के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। साथ ही वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास और क्षेत्र की जैव विविधता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि मुंबई और भोपाल से जुड़ी कुछ कंपनियों पर इन क्षेत्रों में जमीन घेरने और उसका उपयोग कृषि कार्य के लिए करने के आरोप लगे हैं। हालांकि संबंधित कंपनियों की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण कराया जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि वन भूमि पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, भूमि समतलीकरण या अतिक्रमण किया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ वन अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई केवल हरियाली को ही नहीं, बल्कि जल स्रोतों, मिट्टी की गुणवत्ता और स्थानीय जलवायु को भी प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और दोषियों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल प्रशासन और वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई और भूमि के उपयोग में किसकी भूमिका रही तथा वन भूमि पर कथित अतिक्रमण किस स्तर तक हुआ। वहीं स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रभावित वन क्षेत्र को दोबारा विकसित करने की मांग कर रहे हैं।

