अयोध्या राम मंदिर के बाद बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा विवाद, वीडियो में देंखे निजी समिति पर दान राशि लेने का आरोप; कलेक्टर ने बनाई जांच कमेटी
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद अब मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर का नाम भी चढ़ावे को लेकर विवादों में आ गया है। आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
आगर-मालवा कलेक्टर प्रीति यादव ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और समिति गठन को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
नियमों को दरकिनार कर बनाई गई निजी समिति का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस समिति द्वारा श्रद्धालुओं से चंदा लिया जा रहा था, उसके गठन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यह समिति नियमों के विपरीत बनाई गई थी और पिछले करीब तीन वर्षों से अधिकारियों की जानकारी में ही श्रद्धालुओं से दान राशि ले रही थी।
बगलामुखी मंदिर के लिए पहले से ही एक सरकारी समिति मौजूद है, जिसका नाम मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति है। इस समिति के पदेन अध्यक्ष एसडीएम होते हैं और मंदिर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सरकारी स्तर पर तय है।इसके बावजूद आरोप है कि वर्ष 2024 में अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एक अलग निजी समिति का गठन कर दिया गया।
‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’ पर उठे सवाल
आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2024 में बनाई गई निजी समिति का नाम ‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’ रखा गया। इस समिति में पांच प्रमुख सदस्य निजी व्यक्ति बताए जा रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यही समिति श्रद्धालुओं से चढ़ावे के बदले अपनी रसीदें जारी कर रही थी। मंदिर सरकारी होने के बावजूद निजी संस्था द्वारा दान राशि लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि चांदी के अलावा प्राप्त होने वाली अन्य राशि को निजी बैंक खातों में जमा किया जा रहा था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मंदिर की आय सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित होनी चाहिए थी, ऐसे में निजी खातों में राशि जमा करना नियमों के खिलाफ है।
सात दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है। अब कमेटी मंदिर प्रबंधन, दोनों समितियों की वैधता, दान राशि के लेन-देन और बैंक खातों की जांच करेगी।जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि निजी समिति को किस आधार पर बनाया गया और उसे श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने की अनुमति किसने दी।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
मां बगलामुखी मंदिर देशभर में प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धा पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे और मंदिर प्रबंधन से जुड़े विवाद ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई है।

