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इंदौर में दूषित पानी से 36 मौतों के बाद रोबोटिक जांच, पेयजल और सीवर लाइनों के घालमेल का होगा पता

इंदौर में दूषित पानी से 36 मौतों के बाद रोबोटिक जांच, पेयजल और सीवर लाइनों के घालमेल का होगा पता

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल व्यवस्था की जांच को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेयजल और सीवर लाइनों के बीच संभावित घालमेल का पता लगाने के लिए रोबोटिक तकनीक से पाइपलाइन का निरीक्षण कराने का फैसला लिया है। इस तकनीक के जरिए जमीन खोदे बिना पाइपलाइनों की अंदरूनी स्थिति की जांच की जाएगी।

भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से लोगों के बीमार होने और मौतों के मामले के बाद पानी की गुणवत्ता तथा पाइपलाइन नेटवर्क को लेकर सवाल उठे हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं पेयजल लाइन में सीवर का पानी तो नहीं मिल रहा था। इसी को देखते हुए पाइपलाइनों की विस्तृत जांच की योजना बनाई गई है।

रोबोट बताएगा पाइपलाइन की स्थिति

रोबोटिक निरीक्षण के दौरान विशेष उपकरणों को पाइपलाइन के अंदर भेजा जाएगा। कैमरे और सेंसर की मदद से पाइप के भीतर की स्थिति रिकॉर्ड की जा सकेगी। इससे पाइपलाइन में टूट-फूट, लीकेज, दरार या किसी अन्य तरह की समस्या का पता लगाने में मदद मिलेगी।

इस जांच का एक उद्देश्य पेयजल और सीवर लाइनों के संभावित संपर्क वाले स्थानों की पहचान करना भी है। यदि दोनों लाइनों के बीच किसी स्थान पर लीकेज या कनेक्शन की समस्या सामने आती है तो उसे चिह्नित कर सुधार की कार्रवाई की जा सकेगी।

बिना सड़क खोदे होगी जांच

रोबोटिक तकनीक की खासियत यह है कि पाइपलाइन के अंदर की स्थिति देखने के लिए हर जगह सड़क या जमीन खोदने की जरूरत नहीं होगी। इससे जांच का काम तेजी से करने में मदद मिल सकती है और आम लोगों को भी सड़क खुदाई के कारण होने वाली परेशानी से बचाया जा सकता है।

जांच के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर संबंधित विभाग पाइपलाइन नेटवर्क की मरम्मत और सुधार की योजना तैयार करेगा। जरूरत के अनुसार खराब पाइपलाइन को बदला भी जा सकता है।

भागीरथपुरा मामले के बाद बढ़ी निगरानी

भागीरथपुरा में दूषित पानी की शिकायतों और मौतों के बाद प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को लेकर निगरानी बढ़ाई है। पानी के सैंपल लेकर उनकी जांच की जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं जलापूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

सरकार की ओर से अब पाइपलाइन नेटवर्क की तकनीकी जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। रोबोटिक निरीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पेयजल लाइन और सीवर लाइन के बीच कहीं ऐसा संपर्क तो नहीं है, जिससे पानी दूषित होने का खतरा पैदा हो।

जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों का फोकस फिलहाल दूषित पानी की वजह का पता लगाने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

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