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दतिया मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन पर आय से 321% अधिक संपत्ति का केस दर्ज, 2.31 करोड़ की आय के मुकाबले 9.74 करोड़ खर्च

दतिया मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन पर आय से 321% अधिक संपत्ति का केस दर्ज, 2.31 करोड़ की आय के मुकाबले 9.74 करोड़ खर्च

मध्य प्रदेश के दतिया मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. राजेश गौर लोकायुक्त की जांच के घेरे में आ गए हैं। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में केस दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में डॉ. गौर और उनके परिवार की ज्ञात आय तथा खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जांच के मुताबिक, परिवार की ज्ञात आय करीब 2.31 करोड़ रुपये रही, जबकि इस अवधि में कुल खर्च और संपत्ति अर्जित करने पर 9.74 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस तरह ज्ञात आय से करीब 7.43 करोड़ रुपये अधिक खर्च होने का अनुमान है।

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में यह अंतर करीब 321 प्रतिशत बताया गया है। जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और संपत्ति अर्जित करने के लिए किन स्रोतों का इस्तेमाल किया गया।

आय और खर्च के आंकड़ों में बड़ा अंतर

प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, डॉ. राजेश गौर और उनके परिवार की ज्ञात आय 2.31 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले खर्च और संपत्ति से जुड़ा कुल आंकड़ा 9.74 करोड़ रुपये पाया गया। आय और खर्च के बीच करीब 7.43 करोड़ रुपये का अंतर है।

लोकायुक्त को संदेह है कि परिवार की ज्ञात आय के अनुपात में अर्जित संपत्ति और किए गए खर्च का हिसाब स्पष्ट नहीं है। इसी आधार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, यह प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष हैं। अंतिम स्थिति विस्तृत जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

कई जगह भूखंड और भवन होने की जानकारी

जांच के दौरान डॉ. गौर और उनके परिवार से जुड़ी कई संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। इनमें अलग-अलग स्थानों पर भूखंड और भवन शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बैंक लोन और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

लोकायुक्त की टीम संपत्तियों की खरीद, उनके मूल्य और भुगतान के स्रोतों की पड़ताल करेगी। यह भी देखा जाएगा कि संपत्तियां किसके नाम पर खरीदी गईं और उनके लिए रकम कहां से जुटाई गई। बैंक खातों, ऋण से जुड़े दस्तावेजों और संपत्ति के रिकॉर्ड का मिलान कर आय और खर्च का वास्तविक अंतर पता लगाने की कोशिश की जाएगी।

दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी संबंधित अधिकारी और परिवार की वैध आय, निवेश, संपत्ति तथा खर्च का ब्योरा जुटाती है। इसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह आकलन किया जाता है कि संपत्ति ज्ञात आय के स्रोतों से अर्जित की गई है या नहीं।

डॉ. राजेश गौर के मामले में भी लोकायुक्त की जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल केस दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी का ध्यान आय के स्रोतों और संपत्ति के वास्तविक मूल्य का पता लगाने पर है।

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