मध्य प्रदेश से मेट्रो शहरों तक पहुंच रही थी 90% ड्रग्स की खेप, DRI की 6 महीने की कार्रवाई में खुलासा; सितंबर में 7 और अक्टूबर में 3 मामले
मध्य प्रदेश के रास्ते देश के बड़े महानगरों तक नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क जांच एजेंसियों के रडार पर है। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की पिछले छह महीनों में हुई कार्रवाइयों से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जब्त की गई ड्रग्स की लगभग 90 प्रतिशत खेप मेट्रो शहरों में खपाने के लिए ले जाई जा रही थी। इंदौर और भोपाल में की गई जांच में यह बात सामने आई कि तस्कर मध्य प्रदेश का इस्तेमाल नशीले पदार्थों को दूसरे स्थानों तक पहुंचाने के लिए कर रहे थे। हालांकि, इस आंकड़े का सटीक दायरा और संबंधित मामलों का विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना जरूरी है।
सितंबर में 7 और अक्टूबर में 3 कार्रवाइयां
दिए गए विवरण के अनुसार, पिछले दो महीनों में DRI ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े कुल 10 मामलों में कार्रवाई की। इनमें सितंबर के सात और अक्टूबर के तीन मामले शामिल हैं। इन कार्रवाइयों से तस्करी के नेटवर्क और नशीले पदार्थों की आवाजाही पर निगरानी रखने की आवश्यकता सामने आती है।
जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में केवल नशीले पदार्थों को जब्त करना ही पर्याप्त नहीं होता। तस्करी के स्रोत, खेप को पहुंचाने वाले लोगों और अंतिम खरीदारों तक पहुंचना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क की पहचान करने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।
इंदौर और भोपाल में जांच के दौरान सामने आई जानकारी
DRI की ओर से इंदौर और भोपाल में की गई जांच के बारे में दिए गए विवरण के मुताबिक, तस्कर मध्य प्रदेश में ड्रग्स की खपत करने के बजाय यहां से खेप को दूसरे शहरों तक ले जा रहे थे। इससे राज्य के परिवहन मार्गों और अन्य राज्यों से जुड़ने वाले नेटवर्क की जांच का महत्व बढ़ जाता है।
बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और दिल्ली जैसे महानगरों तक नशीले पदार्थों की सप्लाई किए जाने की आशंका तस्करी रोकने के प्रयासों को और महत्वपूर्ण बनाती है। हालांकि, प्रत्येक शहर में कितनी मात्रा में ड्रग्स पहुंचाई जा रही थी और इस कारोबार में कौन-कौन से लोग शामिल थे, इसकी पुष्टि के लिए मामलेवार आधिकारिक जानकारी जरूरी है।
सात एकड़ जमीन पर गांजे की खेती का मामला
दिए गए इनपुट में धुले स्थित एक प्राणी संग्रहालय से जुड़े क्षेत्र में सात एकड़ जमीन पर गांजे की खेती किए जाने का भी उल्लेख है। यदि इस मामले की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह नशीले पदार्थों के उत्पादन और उनकी आपूर्ति की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
गांजे की अवैध खेती और उससे जुड़े कारोबार पर कार्रवाई के लिए जांच एजेंसियों को खेती के स्थान, जमीन के मालिकाना हक, संबंधित लोगों और संभावित वितरण नेटवर्क की पड़ताल करनी होती है। इस मामले में स्थान और प्राणी संग्रहालय से संबंधित विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
तस्करी रोकने के लिए बढ़ानी होगी निगरानी
मध्य प्रदेश से दूसरे राज्यों तक नशीले पदार्थों की कथित सप्लाई के मामलों में परिवहन मार्गों की निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान महत्वपूर्ण है। DRI जैसी एजेंसियां राजस्व खुफिया और तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई करती हैं, जबकि अन्य संबंधित एजेंसियां भी अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच में भूमिका निभाती हैं।
छह महीनों में 90 प्रतिशत खेप के महानगरों में भेजे जाने का दावा इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति समझने के लिए कुल जब्त खेपों की संख्या, नशीले पदार्थों के प्रकार और संबंधित मामलों के आधिकारिक आंकड़ों को देखना जरूरी होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मध्य प्रदेश का इस्तेमाल किस स्तर तक तस्करी के पारगमन मार्ग के रूप में किया जा रहा था।

