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जच्चा-बच्चा की मौत के 7 दिन बाद अस्पताल अधीक्षक हटाए गए, रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डॉक्टर की टिप्पणी से मचा था हंगामा

जच्चा-बच्चा की मौत के 7 दिन बाद अस्पताल अधीक्षक हटाए गए, रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डॉक्टर की टिप्पणी से मचा था हंगामा

मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के करीब सात दिन बाद अस्पताल के अधीक्षक को पद से हटा दिया गया है। मामले ने उस समय तूल पकड़ा था, जब इलाज के दौरान एक डॉक्टर की कथित टिप्पणी को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए थे। डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा था कि महिला के 22 वर्षीय भाई ने उसे गर्भवती कर दिया।

बताया जा रहा है कि महिला प्रसव संबंधी समस्या के चलते संजय गांधी अस्पताल में भर्ती थी। उपचार के दौरान महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठाए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से जांच शुरू की गई।

घटना से जुड़े विवाद का एक अहम पहलू डॉक्टर की कथित टिप्पणी रही। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने महिला की गर्भावस्था को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उसके 22 वर्षीय भाई ने ही उसे गर्भवती किया है। इस टिप्पणी के बाद मामला और संवेदनशील हो गया। परिजनों ने डॉक्टर के बयान की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।

जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने अस्पताल से संबंधित रिकॉर्ड और उपचार की जानकारी जुटाई। यह भी जांच की जा रही है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।

करीब एक सप्ताह बाद अस्पताल अधीक्षक को पद से हटाने की कार्रवाई सामने आई है। हालांकि, अधीक्षक को हटाने का आदेश सीधे तौर पर मौत की घटना में उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। विभागीय स्तर पर कार्रवाई के कारण और जांच के निष्कर्ष अलग से स्पष्ट होंगे।

मामले में महिला और बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। वहीं, डॉक्टर द्वारा की गई कथित टिप्पणी की भी जांच की जा रही है।

घटना के बाद अस्पताल में मरीजों के परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गंभीर मामलों के दौरान इलाज के साथ मरीज और परिजनों से संवेदनशील तरीके से संवाद किया जाना चाहिए।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जच्चा-बच्चा की मौत के लिए कौन से कारण जिम्मेदार थे और डॉक्टर की कथित टिप्पणी के मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी।

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