श्रमिकों को ई-स्कूटी खरीदने 40 हजार रुपए की मदद, बढ़ई-वेल्डर-प्लंबर समेत 49 निर्माण श्रमिकों को फायदा
मध्य प्रदेश में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आवागमन की सुविधा बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से ई-स्कूटी खरीदने में आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना के तहत बढ़ई, वेल्डर, प्लंबर समेत विभिन्न श्रेणियों के निर्माण श्रमिकों को ई-स्कूटी खरीदने के लिए 40 हजार रुपए तक की मदद दी जाएगी। इस योजना के तहत इस साल 1 हजार श्रमिकों को लाभ देने का लक्ष्य तय किया गया है।
अब तक योजना के तहत 49 निर्माण श्रमिकों को इसका लाभ मिल चुका है। सरकार का उद्देश्य श्रमिकों को काम की जगह तक आसानी से पहुंचने के लिए अपना वाहन उपलब्ध कराना और उनके रोजाना आने-जाने का खर्च कम करना है।
बढ़ई, वेल्डर और प्लंबर को मिलेगा फायदा
योजना का लाभ अलग-अलग काम करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को दिया जा रहा है। इनमें बढ़ई, वेल्डर और प्लंबर सहित निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य श्रमिक शामिल हैं।
इन श्रमिकों को काम के सिलसिले में रोजाना अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। निजी वाहन नहीं होने पर उन्हें सार्वजनिक परिवहन या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ई-स्कूटी मिलने से उनके लिए काम पर पहुंचना आसान हो सकता है।
40 हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता
योजना के तहत पात्र श्रमिकों को ई-स्कूटी खरीदने के लिए 40 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। इससे श्रमिकों पर वाहन खरीदने का आर्थिक बोझ कम होगा।
ई-स्कूटी का इस्तेमाल पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की तुलना में कम खर्च में किया जा सकता है। ऐसे में योजना से श्रमिकों के परिवहन खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।
इस साल 1 हजार का कोटा
सरकार ने चालू वर्ष के लिए योजना के तहत 1 हजार निर्माण श्रमिकों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 49 श्रमिकों को सहायता दी जा चुकी है। आने वाले समय में पात्रता पूरी करने वाले अन्य श्रमिकों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
सरकार की ओर से लाभार्थियों के चयन के लिए निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों का पालन किया जा रहा है। श्रमिकों को योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज और पंजीयन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
श्रमिकों के लिए राहत
निर्माण श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक काम की जगह तक नियमित रूप से पहुंचना है। कई श्रमिकों का कार्यस्थल रोज बदलता रहता है। ऐसे में निजी वाहन होने से उन्हें समय और पैसे दोनों की बचत हो सकती है।
ई-स्कूटी सहायता योजना इसी जरूरत को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। इससे श्रमिकों को रोजगार के लिए अधिक दूर तक जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य है कि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र निर्माण श्रमिकों तक पहुंचे। इस साल 1 हजार श्रमिकों का लक्ष्य तय किया गया है और अब तक 49 श्रमिकों को सहायता मिल चुकी है। आने वाले महीनों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

