रेलवे स्टेशनों पर 40% अपराध ट्रेनों में नहीं, प्लेटफॉर्म और आउटर पर होते हैं, MP GRP ने बदली कार्यप्रणाली
रेलवे स्टेशनों पर होने वाले अपराधों को लेकर मध्य प्रदेश रेलवे पुलिस (जीआरपी) की आंतरिक समीक्षा में अहम जानकारी सामने आई है। समीक्षा के मुताबिक, रेलवे स्टेशनों पर होने वाले करीब 40 प्रतिशत अपराध ट्रेनों के भीतर होने के बजाय प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और आउटर क्षेत्रों में होते हैं। इस निष्कर्ष के बाद मध्य प्रदेश जीआरपी मुख्यालय ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। अब अपराधों पर नियंत्रण के लिए रेलवे स्टेशन के इन संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर अधिक ध्यान देने की तैयारी है।
अब तक रेलवे में सुरक्षा की चर्चा होने पर अक्सर ट्रेनों के भीतर यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती रही है। लेकिन जीआरपी की समीक्षा ने यह संकेत दिया है कि स्टेशन परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी अपराध रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम जरूरी हैं। अपराधों के इस पैटर्न को ध्यान में रखते हुए पुलिस की रणनीति में बदलाव किया जा रहा है।
प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग एरिया पर बढ़ेगा ध्यान
रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म वह स्थान है, जहां यात्रियों की लगातार आवाजाही रहती है। वहीं, सर्कुलेटिंग एरिया में स्टेशन के प्रवेश और निकास मार्ग, पार्किंग तथा यात्रियों के आने-जाने से जुड़े दूसरे हिस्से शामिल होते हैं। इन क्षेत्रों में भीड़ अधिक होने के कारण अपराधियों को वारदात को अंजाम देकर निकलने का मौका मिल सकता है।
जीआरपी की समीक्षा में इन स्थानों पर होने वाले अपराधों की हिस्सेदारी सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। नई कार्यप्रणाली का उद्देश्य केवल ट्रेनों के भीतर ही नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में भी अपराधों की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करना है।
आउटर क्षेत्र भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण
रेलवे के आउटर क्षेत्र वे हिस्से होते हैं, जो स्टेशन के मुख्य प्लेटफॉर्म और भवन से आगे रेल लाइन के आसपास स्थित होते हैं। इन क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और अपराध होने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।
यदि सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान केवल ट्रेन के भीतर तक सीमित रहता है, तो स्टेशन परिसर के दूसरे हिस्सों में अपराध रोकने की चुनौती बनी रह सकती है। इसी कारण जीआरपी की नई रणनीति में इन क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जीआरपी ने बदली कार्यप्रणाली
आंतरिक समीक्षा के निष्कर्षों के आधार पर मध्य प्रदेश जीआरपी मुख्यालय ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। इसका उद्देश्य अपराधों के वास्तविक स्थान और उनके तरीके को ध्यान में रखते हुए पुलिस संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।
हालांकि, नई व्यवस्था के तहत कितने अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, गश्त का समय कैसे तय होगा और सीसीटीवी निगरानी में क्या बदलाव होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन बिंदुओं पर आधिकारिक निर्देश सामने आने के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
यात्रियों की सुरक्षा पर रहेगा जोर
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के सामान की चोरी, जेब काटने और अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता जरूरी है। यात्रियों को भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपने सामान का ध्यान रखने और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना रेलवे पुलिस को देने की सलाह दी जाती है।
जीआरपी की समीक्षा से सामने आया 40 प्रतिशत का आंकड़ा इस बात पर ध्यान दिलाता है कि रेलवे सुरक्षा के लिए केवल ट्रेनों के भीतर निगरानी पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और आउटर जैसे स्थानों पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। नई कार्यप्रणाली से अपराधों की रोकथाम और यात्रियों की सुरक्षा में कितना सुधार होता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।

