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कुपोषण के रेड जोन में 19 आदिवासी बच्चों की मौत, सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 8 दर्ज; 6 महीने से पोषण आहार बंद

कुपोषण के रेड जोन में 19 आदिवासी बच्चों की मौत, सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 8 दर्ज; 6 महीने से पोषण आहार बंद

आदिवासी क्षेत्र में कुपोषण की गंभीर स्थिति सामने आई है। कुपोषण के रेड जोन में शामिल बच्चों में से 19 की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इनमें से केवल 8 बच्चों की मौत दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि संबंधित क्षेत्र में बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार करीब छह महीने से बंद बताया जा रहा है।

कुपोषण से प्रभावित बच्चों की मौत के आंकड़ों में अंतर सामने आने के बाद सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर विभागीय रिकॉर्ड में मौतों की संख्या कम दर्ज है, वहीं जमीनी स्तर पर इससे अधिक बच्चों की मौत होने की बात सामने आई है। इससे रिकॉर्ड तैयार करने और निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि क्षेत्र में कई बच्चे पहले से ही कुपोषण की गंभीर श्रेणी में थे। ऐसे बच्चों को नियमित पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होती है। इसके बावजूद करीब छह महीने से पोषण आहार नहीं मिलने की जानकारी सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

पोषण आहार बच्चों के स्वास्थ्य और वजन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर रेड जोन में आने वाले बच्चों की नियमित निगरानी और अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक पोषण आहार की व्यवस्था बाधित रहने से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

मामले में सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर पर सामने आए आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। यह पता लगाना जरूरी है कि 19 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में केवल 8 मौतें ही क्यों दर्ज की गईं। इसके अलावा छह महीने से पोषण आहार बंद रहने के कारणों की भी पड़ताल जरूरी है।

स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर पोषण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंचता है तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है।

अब प्रशासन के सामने बच्चों की मौत के वास्तविक आंकड़ों का सत्यापन करने और पोषण आहार की व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है। साथ ही जिम्मेदार विभागों से यह जवाब भी मांगा जा सकता है कि पोषण आहार छह महीने तक क्यों बंद रहा और बच्चों की स्थिति की नियमित निगरानी किस स्तर पर की गई।

मामला सामने आने के बाद उम्मीद है कि प्रशासन पूरे प्रकरण की जांच कर वास्तविक आंकड़े सामने लाएगा। साथ ही कुपोषण के रेड जोन में मौजूद बच्चों के लिए तत्काल पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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