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MP में मानसून के 15 दिन बाकी, अब तक 88% बारिश; इंदौर-उज्जैन समेत 37 जिलों में कोटा अधूरा

MP में मानसून के 15 दिन बाकी, अब तक 88% बारिश; इंदौर-उज्जैन समेत 37 जिलों में कोटा अधूरा

मध्य प्रदेश में मानसून का सीजन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। मानसून की विदाई में करीब 15 दिन बाकी हैं, लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का केवल 88 प्रतिशत ही पानी बरसा है। प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से कम है। इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत कुल 37 जिलों में अब तक बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में मानसून के बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश पर सभी की नजरें टिकी हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान सामान्य तौर पर होने वाली बारिश की तुलना में इस बार अब तक कमी बनी हुई है। प्रदेश के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन कई जिलों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से औसत आंकड़ा नीचे है। खासकर ऐसे जिले जहां मानसून के शुरुआती और मध्य चरण में बारिश कम रही, वहां अब भी बारिश के सामान्य आंकड़े तक पहुंचने का इंतजार है।

इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों के अलावा जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। इन जिलों में मानसून के अंतिम चरण में अच्छी बारिश होने पर ही आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है। वहीं प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से अधिक भी दर्ज की गई है, जिससे राज्य का औसत आंकड़ा संतुलित बना हुआ है।

मानसून के बचे हुए करीब 15 दिन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस अवधि में यदि अच्छी बारिश होती है तो बारिश की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। हालांकि मानसून की गतिविधियां किस तरह रहती हैं, यह आने वाले दिनों के मौसम सिस्टम पर निर्भर करेगा। बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के रूप में देखने को मिल सकता है।

बारिश की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। प्रदेश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों के लिए मानसूनी बारिश महत्वपूर्ण होती है। सोयाबीन, मक्का, धान समेत कई फसलों की स्थिति बारिश पर निर्भर करती है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां किसानों को आगे की बारिश का इंतजार है। दूसरी ओर जहां लगातार बारिश हुई है, वहां जलभराव और फसलों को नुकसान की स्थिति भी सामने आ सकती है।

मानसून के अंतिम चरण में मौसम विभाग की ओर से स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बारिश को लेकर पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं। किसानों और प्रशासन की नजर भी इन पूर्वानुमानों पर बनी हुई है। यदि अगले दो सप्ताह में प्रदेश के बारिश से पिछड़े जिलों में अच्छी बारिश होती है तो राज्य का कुल बारिश प्रतिशत बेहतर हो सकता है।

फिलहाल मध्य प्रदेश में मानसून की कुल बारिश 88 प्रतिशत दर्ज हुई है और 37 जिलों में सामान्य कोटा पूरा नहीं हुआ है। अब मानसून के अंतिम 15 दिन यह तय करेंगे कि प्रदेश बारिश की कमी को कितना पूरा कर पाता है और सीजन का अंतिम आंकड़ा सामान्य बारिश के कितने करीब पहुंचता है।

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