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खजुराहो के जवारी मंदिर की 11वीं सदी की खंडित विष्णु प्रतिमा को मिलेगा सिर, ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

खजुराहो के जवारी मंदिर की 11वीं सदी की खंडित विष्णु प्रतिमा को मिलेगा सिर, ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध खजुराहो से ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की बड़ी खबर सामने आई है। यहां स्थित जवारी मंदिर में 11वीं सदी की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा को अब उसका सिर वापस मिलने की उम्मीद जगी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने इस प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पहल मंदिर की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सदियों पुरानी प्रतिमा का होगा संरक्षण

जवारी मंदिर खजुराहो के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल है। यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा लंबे समय से खंडित अवस्था में मौजूद है। प्रतिमा का सिर अलग होने के कारण इसकी मूल संरचना अधूरी दिखाई देती है। अब ASI ने प्रतिमा के संरक्षण और पुनर्स्थापना का काम शुरू किया है।

पुनर्स्थापना प्रक्रिया का उद्देश्य प्रतिमा को उसकी ऐतिहासिक और कलात्मक पहचान के अनुरूप संरक्षित करना है। इसके लिए विशेषज्ञ प्रतिमा की संरचना, पत्थर की प्रकृति और उसके पुराने हिस्सों का अध्ययन कर रहे हैं।

11वीं सदी की कला का महत्वपूर्ण उदाहरण

खजुराहो के मंदिर अपनी उत्कृष्ट मूर्तिकला और स्थापत्य कला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां मौजूद प्रतिमाओं में तत्कालीन भारतीय शिल्पकला की बारीकियां देखने को मिलती हैं। जवारी मंदिर की विष्णु प्रतिमा भी इसी कला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

प्रतिमा के संरक्षण का काम केवल एक मूर्ति को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उस दौर की कला और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक तरीके से होगी पुनर्स्थापना

ASI की ओर से संरक्षण और पुनर्स्थापना का काम विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है। प्राचीन प्रतिमाओं को दोबारा जोड़ने में उनके मूल स्वरूप और ऐतिहासिक प्रमाणों का विशेष ध्यान रखा जाता है। किसी भी तरह के बदलाव से पहले प्रतिमा की संरचना और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन किया जाता है।

अगर प्रतिमा के मूल सिर या उसके प्रमाणित हिस्से की पहचान और उपलब्धता संभव होती है, तो उसे वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत प्रतिमा से जोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य प्रतिमा के मूल स्वरूप को अधिकतम संभव सीमा तक बहाल करना होगा।

पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए अहम खबर

खजुराहो आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह पहल खास महत्व रखती है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला और प्राचीन मूर्तियों को देखने पहुंचते हैं। विष्णु प्रतिमा के संरक्षण और संभावित पुनर्स्थापना से जवारी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ सकता है।

अब सभी की नजर ASI की संरक्षण प्रक्रिया पर है। यदि प्रतिमा को उसका सिर वापस मिल जाता है, तो यह खजुराहो की प्राचीन कला विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

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