मप्र में 3 करोड़ से ज्यादा कारोबार वाली 110 मंडियां, 10 साल बाद होगी ग्रेडिंग; लाखों टन अनाज की होती है आवक
मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडियों की स्थिति और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अब लंबे समय बाद मंडियों की ग्रेडिंग की जाएगी। प्रदेश में ऐसी 110 मंडियां चिन्हित की गई हैं, जिनका सालाना कारोबार 3 करोड़ रुपये से अधिक है। इन मंडियों में हर साल लाखों टन से ज्यादा अनाज और अन्य कृषि उपज की खरीदी-बिक्री होती है।
करीब 10 साल बाद मंडियों की ग्रेडिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत मंडियों की सुविधाओं, कारोबार, कृषि उपज की आवक, किसानों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। ग्रेडिंग से मंडियों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और जरूरत के अनुसार सुधार कार्य किए जा सकेंगे।
110 मंडियां ग्रेडिंग के दायरे में
कृषि उपज मंडी बोर्ड के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में मंडियां संचालित हैं, लेकिन इनमें से 110 मंडियां ऐसी हैं, जहां सालाना कारोबार 3 करोड़ रुपये से अधिक है। इन मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं, सोयाबीन, चना, दाल, मक्का और अन्य कृषि उपज की खरीदी-बिक्री होती है।
इन मंडियों में किसानों की बड़ी संख्या पहुंचती है, इसलिए यहां की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखना जरूरी है। ग्रेडिंग के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कौन सी मंडियां बेहतर काम कर रही हैं और किन मंडियों में सुधार की आवश्यकता है।
दस साल बाद हो रहा मूल्यांकन
मंडियों की ग्रेडिंग आखिरी बार करीब एक दशक पहले की गई थी। इसके बाद अब दोबारा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि समय के साथ कृषि व्यापार के तरीके और किसानों की जरूरतें बदल गई हैं। ऐसे में मंडियों की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन करना जरूरी हो गया है।
नई ग्रेडिंग में मंडियों में उपलब्ध सुविधाओं जैसे सड़कों की स्थिति, नीलामी व्यवस्था, भंडारण सुविधा, पेयजल, किसानों के बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और डिजिटल सुविधाओं को भी शामिल किया जा सकता है।
किसानों को मिलेगा फायदा
मंडी ग्रेडिंग का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। बेहतर ग्रेड वाली मंडियों में किसानों को सुविधाएं मिलने के साथ ही कृषि उपज बेचने में आसानी होगी। वहीं, कमजोर प्रदर्शन करने वाली मंडियों में सुधार के लिए योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
कृषि विभाग और मंडी बोर्ड का उद्देश्य मंडियों को आधुनिक और किसान हितैषी बनाना है। इसके लिए यह जरूरी है कि मंडियों की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जाए और उसी आधार पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।
कृषि कारोबार का बड़ा केंद्र हैं मंडियां
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी मात्रा में अनाज और तिलहन का उत्पादन होता है। मंडियां किसानों और व्यापारियों के बीच कृषि उपज के लेन-देन का मुख्य केंद्र होती हैं।
प्रदेश की बड़ी मंडियों में हर साल लाखों टन अनाज की आवक होती है। ऐसे में इन मंडियों की व्यवस्थाओं को मजबूत करना कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब ग्रेडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदेश की कौन सी मंडियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इसके आधार पर मंडियों के विकास और सुविधाओं को लेकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

