Samachar Nama
×

Thiruvananthapuram. में कट्टरपंथियों ने जिस प्रोफेसर का काट दिया था हाथ उन्होंने धार्मिक सद्भाव को लेकर कही बड़ी बात

Kochi टीका प्रमाणपत्र में तारीख और स्थान गलत होने पर केरल हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

केरल न्यूज डेस्क।। आज से 11 साल पहले कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया  से जुड़े एक कार्यकर्ता ने केरल के एक प्रोफेसर टीजे जोसेफ  का हाथ काट दिया था. का आरोप था कि प्रोफेसर जोसेफ ने धार्मिक भावनाएं आहत की हैं. पिछले साल मलयालम में छपी उनकी किताब बेहद लोकप्रिय रही. इसमें उन्होंने अपनी आपबीती का ज़िक्र किया है. ये किताब उन्होंने अपनी पत्नी को समर्पित किया है. दो साल पहले उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी. प्रोफेसर जोसेफ का कहना है कि धार्मिक सद्भाव एक मकड़ी के जाले की तरह क्षणिक है, जो बाद में खत्म हो जाते हैं. बता दें सभी 13 दोषियों को प्रोफेसर ने माफ कर दिया था


बताया जा रहा है कि, अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए प्रोफेसर जोसेफ ने 11 साल पहले की इस घटना को याद किया. उन्होंने कहा, ‘धार्मिक कट्टरवाद और अतिवाद के चलते 11 साल पहले मुझ पर हमला हुआ, आज की दुनिया में ये काफी प्रासंगिक हैं. मुझे उम्मीद है कि जब धार्मिक उग्रवाद के चंगुल में फंसे लोगों को मेरी कहानी का पता चलेगा, तो उनमें से कम से कम कुछ लोगों के मन में दूसरे विचार होंगे. मुझे ये भी उम्मीद है कि मेरा जीवन उन लोगों को सकारात्मक मदद दे सकता है, जिन्होंने जीवन में बड़ी असफलताओं का सामना किया है, उनकी कोई गलती नहीं है और जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.’


बता दें कि, प्रोफेसर जोसेफ ने 26 मार्च 2010 की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र विवाद शुरू होने के बाद से उन्हें एक अपराधी और ईशनिंदा के आरोपी के रूप में चित्रित किया गया. उन्होंने कहा, ‘बीकॉम के दूसरे सेमेस्टर की इंटरनल परीक्षा के प्रश्नपत्र में मैंने जिस ‘मोहम्मद’ का इस्तेमाल किया था, वो लेखक पी टी कुंजू मोहम्मद के लिए था, लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि मैंने पैगम्बर का अपमान करने के लिए जानबूझकर इसका गलत अर्थ निकाला. हालांकि जब कट्टरपंथियों ने मेरी हथेली काट दी तो कुछ लोगों को सहानुभूति हुई, फिर भी वे मानते थे कि ये एक अपराध की सजा है. मैं सत्य को सामने लाना चाहता था और एक आत्मकथा इसके लिए आदर्श माध्यम थी. इसके अलावा मैं ये बताना चाहता था कि धार्मिक अतिवाद के कारण हम कितने असुरक्षित हैं. ऐसी स्थिति आने पर इस देश में कोई भी सुरक्षित नहीं है. वे मकड़ी के जाले की तरह अल्पकालिक और कमजोर हैं.’


इसके आगे बताया जा रहा है कि, उस वक्त जोसेफ का कहना था कि उन्होंने सभी को माफ कर दिया है. उनका कहना था कि वो सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि धार्मिक संगठनों के दबाव में उन्हें कॉलेज से सस्पेंड कर दिया गया था. बाद में कॉलेज में उन्हें दोबारा नौकरी नहीं मिली. कहा जाता है कि सामाजिक दबाव और आर्थिक परेशानियों के चलते उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली. प्रोपेसर जोसेफ ने कहा, ‘शुरुआत में कॉलेज और चर्च के लोगों ने मेरी काफी मदद की. लेकिन बाद में दबाव में आकर उन्होंने मेरा साथ छोड़ दिया. मेरे कई ईसाई दोस्त और रिश्तेदारों ने घर आना बंद कर दिया था.’

तिरुवनंतपुरम  न्यूज डेस्क।। 

Share this story