डोसा की “राजधानी” पर नई बहस, चेन्नई–मैसूर नहीं, बेंगलुरु और उडुपी बने चर्चा का केंद्र
भारत के लोकप्रिय व्यंजन डोसा को लेकर एक दिलचस्प बहस फिर से चर्चा में है। अक्सर लोग मानते हैं कि डोसा की असली पहचान दक्षिण भारत के शहर Chennai या Mysore से जुड़ी है, लेकिन हाल के फूड ट्रेंड्स और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में आए बदलावों ने इस धारणा को चुनौती दी है। अब इस बहस में Bengaluru और Udupi का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
फूड एक्सपर्ट्स और ट्रैवल गाइड्स के अनुसार, डोसा की असली जड़ें उडुपी क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती हैं, जहां सदियों से शुद्ध शाकाहारी दक्षिण भारतीय भोजन की परंपरा विकसित हुई। उडुपी शैली के डोसे ने ही आगे चलकर देश और दुनिया में डोसा संस्कृति को लोकप्रिय बनाया।
उडुपी: डोसा संस्कृति की जड़
उडुपी को अक्सर डोसा और दक्षिण भारतीय व्यंजनों की पारंपरिक “जननी भूमि” कहा जाता है। यहां के मंदिर भोजनालयों और पारंपरिक रसोई से शुरू हुई यह परंपरा धीरे-धीरे पूरे भारत में फैली। विशेषज्ञ मानते हैं कि उडुपी शैली के सादा और स्वादिष्ट डोसे ने ही इस व्यंजन को वैश्विक पहचान दिलाई।
बेंगलुरु बना आधुनिक फूड हब
वहीं दूसरी ओर, बेंगलुरु आज डोसा के आधुनिक रूप और विविधता के लिए जाना जाता है। शहर में पारंपरिक डोसे से लेकर फ्यूजन डोसे तक की अनगिनत वैरायटी मिलती हैं। फूड इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय फूड मैप पर बेंगलुरु तेजी से उभरता हुआ शहर बन गया है, जहां डोसा को ग्लोबल पहचान मिली है।
हालिया फूड रैंकिंग और ट्रैवल रिपोर्ट्स में बेंगलुरु को भारत के प्रमुख स्ट्रीट फूड डेस्टिनेशन में शामिल किया गया है, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी है।
चेन्नई और मैसूर की ऐतिहासिक पहचान
दूसरी ओर, चेन्नई और मैसूर का डोसा से गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। मसाला डोसा और मैसूर मसाला डोसा जैसे व्यंजन इन्हीं क्षेत्रों से लोकप्रिय हुए। इन शहरों ने डोसा को एक विशिष्ट स्वाद और पहचान दी है, जो आज भी बरकरार है।
ग्लोबल फूड रैंकिंग में बढ़ता भारत का प्रभाव
फूड टूरिज्म विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय व्यंजन, खासकर डोसा, अब वैश्विक स्तर पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसकी वजह इसकी सादगी, स्वास्थ्य लाभ और विविधता है। अंतरराष्ट्रीय फूड प्लेटफॉर्म्स पर भी भारतीय स्ट्रीट फूड को अब अधिक मान्यता मिल रही है।

