कर्नाटक सरकार में मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, वीडियो में जाने पसंदीदा विभाग नहीं मिलने से नाराजगी की चर्चा
कर्नाटक की नई सरकार के गठन के महज तीन दिन बाद ही कैबिनेट में असंतोष की खबर सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री Ramalinga Reddy ने शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि वे विभागों के बंटवारे से संतुष्ट नहीं थे और अपनी पसंद का मंत्रालय नहीं मिलने से नाराज थे।
मुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने एक दिन पहले ही मंत्रियों के विभागों का आवंटन किया था। रेड्डी बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी चाहते थे, लेकिन उन्हें जल संसाधन विभाग सौंपा गया था।
इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी?
इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा, "मैं अब भी कांग्रेस में हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है।"रेड्डी ने कहा कि पिछले 53 वर्षों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और विभिन्न मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के रूप में काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की।
यात्रा वाले विभाग को लेकर जताई चिंता
सूत्रों के अनुसार, रामलिंगा रेड्डी की मुख्य चिंता विभाग की कार्यशैली को लेकर है। माना जा रहा है कि जल संसाधन विभाग में राज्य के विभिन्न हिस्सों का लगातार दौरा करना पड़ता है, जिसे लेकर उन्होंने असहजता जताई है।बताया जा रहा है कि वे ऐसा विभाग चाहते हैं जिसमें उन्हें अपेक्षाकृत कम यात्रा करनी पड़े और प्रशासनिक स्तर पर अधिक काम करने का अवसर मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा- बातचीत से निकलेगा समाधान
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है और मामले को बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि रामलिंगा रेड्डी एक वरिष्ठ नेता हैं और उनकी चिंताओं को समझा जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि पार्टी और सरकार के भीतर सभी मुद्दों का समाधान आपसी संवाद से निकाल लिया जाएगा।
सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती
नई सरकार के गठन के तुरंत बाद सामने आए इस घटनाक्रम को कांग्रेस नेतृत्व के लिए पहली राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व फिलहाल इसे आंतरिक मामला बताते हुए जल्द समाधान का भरोसा जता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नाराज नेताओं को संतुष्ट नहीं किया गया तो सरकार के भीतर असंतोष बढ़ सकता है। वहीं कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को जल्द शांत करने की कोशिश में जुट गया है। फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री शिवकुमार और रामलिंगा रेड्डी के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि मामला सुलझता है या कर्नाटक की राजनीति में आगे कोई नया मोड़ आता है।

