झारखंड में अनोखी पहल: बच्चों के साथ अब उनके माता-पिता भी जाएंगे स्कूल, निरक्षर अभिभावकों को पढ़ाएगी सरकार
झारखंड सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय और दूरगामी पहल की है। राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ अब उन बच्चों के माता-पिता को भी पढ़ाया जाएगा, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते हैं। सरकार ने ऐसे निरक्षर माता-पिता के लिए स्कूल परिसरों में ही अलग से कक्षाएं चलाने का फैसला किया है। यह पहल ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत शुरू की जा रही है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल बच्चों तक शिक्षा को सीमित रखना नहीं है, बल्कि पूरे परिवार को साक्षर बनाना है। कई बार देखा गया है कि निरक्षर माता-पिता बच्चों की पढ़ाई में सहयोग नहीं कर पाते, जिससे बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने यह अभिनव कदम उठाया है।
योजना के तहत सरकारी स्कूलों में शाम के समय या स्कूल समय के बाद विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें पढ़ना-लिखना नहीं जानने वाले अभिभावकों को बुनियादी शिक्षा दी जाएगी। इन कक्षाओं में अक्षर ज्ञान, सरल गणित, दैनिक जीवन में उपयोगी पढ़ाई और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दी जाएगी, ताकि अभिभावक आत्मनिर्भर बन सकें।
उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित शिक्षक, स्वयंसेवक और शिक्षा मित्र इन कक्षाओं का संचालन करेंगे। खास बात यह है कि पढ़ाई का तरीका पूरी तरह सरल और व्यवहारिक होगा, ताकि माता-पिता बिना किसी संकोच के सीख सकें। शिक्षा विभाग का मानना है कि जब माता-पिता खुद पढ़ना-लिखना सीखेंगे, तो वे अपने बच्चों को भी पढ़ाई के लिए बेहतर तरीके से प्रेरित कर पाएंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना से न सिर्फ साक्षरता दर बढ़ेगी, बल्कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भी कमी आएगी। साथ ही अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे बच्चों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होगा।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि यह योजना सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। झारखंड जैसे राज्य में, जहां अब भी निरक्षरता एक बड़ी चुनौती है, वहां स्कूलों के जरिए पूरे परिवार को शिक्षा से जोड़ना एक प्रभावी रणनीति है।

