बदल रहा गैंगवार का तरीका, अब गिरोह के शूटर नहीं बल्कि बाहर से कराए जा रहे हमले
अपराध की दुनिया में गैंगवार का तौर-तरीका भी तेजी से बदल रहा है। एक दौर था, जब किसी गिरोह की पहचान उसके अपने शूटरों से होती थी। गिरोह के सदस्य ही हथियार उठाते थे और विरोधी गुट से सीधे भिड़कर वारदात को अंजाम देते थे। लेकिन अब अपराध की दुनिया में यह मॉडस तेजी से बदल रहा है।
अपने शूटरों पर निर्भरता कम
पहले गैंग के भीतर ही ऐसे लोगों को तैयार किया जाता था, जो जरूरत पड़ने पर विरोधी गुट पर हमला कर सकें। गैंग के सदस्य ही रेकी से लेकर हमले तक की जिम्मेदारी संभालते थे। इससे गिरोह की गतिविधियों में शामिल लोगों की भूमिका भी स्पष्ट रहती थी।
अब कई मामलों में अपराधी गिरोह अपने सदस्यों को सीधे वारदात में शामिल करने से बचने की कोशिश करते हैं। इसके बजाय बाहरी लोगों के जरिए अपराध कराने का तरीका अपनाया जा रहा है। इससे मुख्य गिरोह और वारदात को अंजाम देने वालों के बीच दूरी बनाए रखने की कोशिश की जाती है।
बदल रहा अपराध का मॉडस
गैंगवार के इस बदलते तौर-तरीके ने पुलिस के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है। किसी वारदात के बाद जांच एजेंसियों को सिर्फ हमलावरों तक सीमित रहने के बजाय उनके पीछे मौजूद लोगों और नेटवर्क की भी पड़ताल करनी पड़ती है।
ऐसे मामलों में यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमला किसने किया, किसके इशारे पर किया गया और हमलावर का संबंधित गिरोह से क्या संबंध था। यही वजह है कि गैंगवार से जुड़े मामलों की जांच अब पहले की तुलना में अधिक जटिल होती जा रही है।
अपराधियों की रणनीति में बदलाव
अपराध की दुनिया में यह बदलाव बताता है कि गिरोह अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के तरीकों में लगातार बदलाव कर रहे हैं। जहां पहले गिरोह के सदस्य खुद वारदातों में शामिल होते थे, वहीं अब बाहरी लोगों के इस्तेमाल का तरीका सामने आ रहा है।
गैंगवार के इस बदलते पैटर्न पर पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर है। आने वाले समय में ऐसे मामलों की जांच में गिरोह के पूरे नेटवर्क, संपर्कों और वारदात से जुड़े लोगों की भूमिका को खंगालना और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

