बेटे की चाह में कराई भ्रूण की लिंग जांच, बेटी होने का पता चला तो पत्नी का कराया गर्भपात; 24 वर्षीय महिला की मौत, पति समेत 4 गिरफ्तार
झारखंड के धनबाद जिले में बेटे की चाहत में एक गर्भवती महिला की जान चली गई। आरोप है कि पति और ससुराल वालों ने पहले गर्भ में पल रहे बच्चे का अवैध रूप से लिंग परीक्षण कराया। जांच में बेटी होने की जानकारी मिलने के बाद महिला का गर्भपात करा दिया गया। गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में महिला के पति, डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक, एक कर्मचारी और नर्स समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
मृतका की पहचान 24 वर्षीय किरण कुमारी के रूप में हुई है। घटना धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के श्यामडीह की है। किरण मूल रूप से बोकारो जिले के पेटरवार थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। परिजनों के मुताबिक, वह तीन से चार महीने की गर्भवती थी। दंपती की पहले से एक बेटी है। आरोप है कि पति और ससुराल के लोग इस बार बेटा चाहते थे।
डायग्नोस्टिक सेंटर में कराई गई लिंग जांच
परिजनों का आरोप है कि किरण को भ्रूण का लिंग पता करने के लिए श्यामडीह चौक स्थित सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर ले जाया गया था। वहां कथित तौर पर लिंग परीक्षण कराया गया। जब जांच में गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिली तो गर्भपात कराने का फैसला लिया गया। मृतका के पिता राजेंद्र कुमार केवट ने आरोप लगाया कि पति सोनू केवट और ससुराल के अन्य लोगों ने किरण पर इसके लिए दबाव बनाया था।
गर्भपात के दौरान बिगड़ी हालत, अस्पताल में मौत
आरोप है कि किरण का गर्भपात गलत तरीके से कराया गया। इस दौरान उसे काफी ज्यादा रक्तस्राव होने लगा और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई। इसके बाद उसे श्यामडीह स्थित संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गर्भपात की प्रक्रिया के समय वहां कोई योग्य विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। गलत तरीके से गर्भपात किए जाने और अत्यधिक रक्तस्राव को महिला की मौत की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगी।
पति, सेंटर संचालक और नर्स समेत चार गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए मृतका के पति सोनू केवट, सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक सचिन कुमार केवट, सेंटर के कर्मचारी विजय गोस्वामी और नर्स सुलोचना देवी को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस ने संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया है। मृतका के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। प्राथमिकी में ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
फिर सवालों के घेरे में भ्रूण लिंग जांच
यह घटना एक बार फिर भ्रूण का लिंग पता करने और बेटी होने पर गर्भपात कराने जैसी गंभीर सामाजिक समस्या को सामने लाती है। भारत में गर्भस्थ शिशु का लिंग पता करना और बताना कानूनन प्रतिबंधित है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित लिंग जांच और गर्भपात की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
SIR की आड़ में भेजे जा रहे फर्जी लिंक और मेल, चुनाव आयोग ने बताईं 5 सावधानियां
SIR की आड़ में भेजे जा रहे फर्जी लिंक और ई-मेल, चुनाव आयोग ने दी चेतावनी; बताईं 5 जरूरी सावधानियां
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बीच साइबर ठगों ने लोगों को निशाना बनाने का नया तरीका खोज लिया है। झारखंड समेत कई राज्यों में मतदाताओं को फर्जी ई-मेल भेजकर ठगी की कोशिश की जा रही है। इन ई-मेल में दावा किया जा रहा है कि SIR के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के कारण उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया है। नाम दोबारा जुड़वाने के लिए ई-मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक कर व्यक्तिगत जानकारी और दस्तावेज अपलोड करने को कहा जा रहा है।
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने ऐसे फर्जी ई-मेल को लेकर मतदाताओं को सतर्क किया है। कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO) या निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) इस तरह के ई-मेल भेजकर लोगों से किसी लिंक के माध्यम से प्रमाणपत्र या दस्तावेज अपलोड करने के लिए नहीं कह रहे हैं। ऐसे संदेशों के जरिए साइबर अपराधी लोगों की निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
फर्जी ई-मेल में क्या लिखा होता है?
साइबर ठगों की ओर से भेजे जा रहे ई-मेल में मतदाता को बताया जाता है कि उसके नाम या दस्तावेजों में विसंगति मिली है। इसके कारण नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है या हटाया जा सकता है। इसके बाद नाम दोबारा जुड़वाने के लिए एक लिंक दिया जाता है।
लिंक खोलने पर मतदाता से व्यक्तिगत जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य विवरण मांगे जा सकते हैं। ऐसे लिंक असली सरकारी वेबसाइट जैसे दिख सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य जानकारी चुराना हो सकता है। चुनाव अधिकारियों ने लोगों से ऐसे ई-मेल पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।
चुनाव आयोग ने बताईं ये 5 सावधानियां
1. संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें: SIR या मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के नाम पर ई-मेल, व्हाट्सऐप या सोशल मीडिया पर आए अनजान लिंक को न खोलें।
2. निजी जानकारी साझा न करें: किसी अनजान वेबसाइट पर आधार नंबर, वोटर आईडी, मोबाइल नंबर, पहचान से जुड़े दस्तावेज या अन्य निजी जानकारी न भरें।
3. OTP किसी को न बताएं: फोन, ई-मेल या मैसेज के जरिए मांगे जाने पर किसी के साथ OTP साझा न करें। अनजान व्यक्ति को दस्तावेज भेजने से भी बचें।
4. BLO से सीधे संपर्क करें: SIR के तहत किसी तरह के सत्यापन या दस्तावेज जमा करने की जरूरत हो तो अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करें। ई-मेल में दिए गए नंबर या लिंक के बजाय आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।
5. केवल आधिकारिक पोर्टल और ऐप का इस्तेमाल करें: मतदाता सूची और SIR से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल https://voters.eci.gov.in/ या ECINET मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
SIR के नाम पर पैसे मांगने वालों से भी रहें सावधान
साइबर ठग कई बार मतदाता सूची से नाम कटने का डर दिखाकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस या वेरिफिकेशन चार्ज मांगते हैं। ऐसे किसी भी भुगतान से बचें। राजस्थान पुलिस की पूर्व साइबर एडवाइजरी में भी स्पष्ट किया गया था कि SIR की प्रक्रिया के नाम पर OTP, आधार, पैन या बैंक संबंधी जानकारी नहीं मांगी जाती।
अगर किसी के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।चुनाव आयोग की अपील है कि मतदाता घबराहट में किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और SIR से जुड़ी जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक माध्यमों से ही करें।

