झारखंड में ‘समावेशी आजीविका योजना’ की शुरुआत, अति गरीब परिवारों के लिए नई उम्मीद
झारखंड में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने शुक्रवार को अति गरीब परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए एक नई योजना की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने ‘झारखंड समावेशी आजीविका योजना’ (जेएच-एसएवाई) का औपचारिक अनावरण किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार का फोकस केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना भी है।
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अति गरीब परिवारों की पहचान कर उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसमें कौशल विकास, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा, पशुपालन, कृषि आधारित उद्यम और स्वरोजगार के अवसर शामिल किए जाने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि यह पहल झारखंड में गरीबी उन्मूलन और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी परिवार बुनियादी जरूरतों से वंचित न रहे और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिले।
अधिकारियों के अनुसार, योजना को चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। पहले चरण में उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां गरीबी और बेरोजगारी की दर अधिक है। इसके बाद योजना का विस्तार अन्य क्षेत्रों में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना यदि प्रभावी ढंग से लागू की गई तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन और निगरानी प्रणाली पर निर्भर करेगा।
स्थानीय स्तर पर इस योजना को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और संसाधन मिलें, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
फिलहाल सरकार ने संबंधित विभागों को योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं, और जल्द ही इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

