4 जेलों में शुरू होगी ओपन और सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था, कैदियों को 12 घंटे बाहर काम करने की मिलेगी छूट
झारखंड सरकार जेलों में बंद कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य की चार जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था के तहत पात्र और चयनित कैदियों को जेल परिसर से बाहर जाकर काम करने का अवसर मिलेगा। ऐसे कैदी दिन में करीब 12 घंटे तक बाहर रहकर रोजगार या अन्य निर्धारित गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे और इसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना होगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल कैदियों को सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और जेल से रिहाई के बाद सामान्य जीवन में वापस लौटने के लिए तैयार करना है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ सभी कैदियों को नहीं मिलेगा। इसके लिए कैदियों के आचरण, अपराध की प्रकृति, सजा की स्थिति और जेल में उनके व्यवहार समेत कई मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
चुनिंदा कैदियों को मिलेगी सुविधा
ओपन और सेमी-ओपन जेल व्यवस्था के तहत ऐसे कैदियों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिनका जेल में आचरण अच्छा रहा हो और जिनसे समाज की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा न हो। चयन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जाएगी।
इन कैदियों को काम करने के लिए जेल से बाहर जाने की अनुमति होगी। वे निर्धारित समय तक बाहर रहकर काम करेंगे और तय समय सीमा के भीतर वापस जेल लौटेंगे। इस दौरान उनकी गतिविधियों पर निगरानी भी रखी जाएगी।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य कैदियों को काम के जरिए जिम्मेदारी और अनुशासन का अनुभव कराना है। रोजगार मिलने से वे आर्थिक रूप से भी कुछ हद तक आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
चार जेलों में शुरू होगी व्यवस्था
झारखंड सरकार फिलहाल राज्य की चार जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संबंधित जेलों में आवश्यक व्यवस्थाओं और आधारभूत सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है।
सेमी-ओपन व्यवस्था में कैदियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, लेकिन उनकी निगरानी जेल प्रशासन के नियंत्रण में रहती है। वहीं ओपन जेल की व्यवस्था में पात्र कैदियों को निर्धारित नियमों के तहत अधिक स्वतंत्र माहौल में रहने और काम करने का अवसर मिल सकता है।
दिन में बाहर, रात में जेल में वापसी
नई व्यवस्था के तहत चयनित कैदियों को दिन में करीब 12 घंटे तक बाहर रहकर काम करने की अनुमति दिए जाने की योजना है। काम खत्म होने के बाद उन्हें वापस जेल लौटना होगा।
कैदियों को बाहर जाने की अनुमति किस तरह दी जाएगी और उनके लिए कौन-कौन से काम निर्धारित होंगे, यह जेल प्रशासन और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले नियमों के आधार पर निर्धारित होगा।
पुनर्वास पर सरकार का जोर
जेल प्रशासन में सुधारवादी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदियों के सामने रिहाई के बाद रोजगार और सामान्य जीवन में लौटने की बड़ी चुनौती होती है। काम करने का अवसर मिलने से उन्हें भविष्य के लिए कौशल और अनुभव हासिल करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की योजना सफल रहती है तो ओपन और सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था कैदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, सुरक्षा और निगरानी से जुड़े मानकों का पालन इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
फिलहाल झारखंड की चार जेलों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी चल रही है। अब यह देखना होगा कि चयन प्रक्रिया, काम के अवसर और निगरानी से जुड़े अंतिम नियम क्या तय किए जाते हैं और कितने पात्र कैदियों को इसका लाभ मिल पाता है।

