एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट: झारखंड में हत्याओं में कमी, लेकिन युवा अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की 2024 की रिपोर्ट में झारखंड से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुल हत्या के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन चिंता की बात यह है कि पीड़ितों में 18 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं की संख्या सबसे अधिक बनी हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में हत्या की घटनाओं में समग्र गिरावट दर्ज होने के बावजूद सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले अपराध अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं। विशेष रूप से युवाओं को इन घटनाओं में सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है।
व्यक्तिगत दुश्मनी और संपत्ति विवाद मुख्य कारण
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में हत्याओं के पीछे सबसे प्रमुख कारण व्यक्तिगत दुश्मनी और संपत्ति विवाद पाए गए हैं। कई मामलों में पारिवारिक झगड़े, जमीन-जायदाद के विवाद और लंबे समय से चले आ रहे आपसी तनाव हिंसक घटनाओं में बदल गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संपत्ति विवाद अभी भी अपराध का एक बड़ा कारण बना हुआ है, जहां कानूनी समाधान की जगह कई बार हिंसा का सहारा लिया जाता है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 18 से 30 वर्ष के युवा हत्या की घटनाओं में सबसे अधिक प्रभावित वर्ग हैं। इस आयु वर्ग के लोग सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारणों से अधिक जोखिम में रहते हैं। बेरोजगारी, आपसी विवाद और अस्थिर सामाजिक माहौल को भी इसका एक कारण माना जा रहा है।
अंधविश्वास से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का विषय
रिपोर्ट में एक गंभीर पहलू यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में महिलाओं की हत्या को “डायन” बताकर अंजाम दिया गया है। इस तरह की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों की गहरी मौजूदगी को दर्शाती हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि डायन प्रथा जैसे अंधविश्वास न केवल सामाजिक रूप से हानिकारक हैं, बल्कि ये कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती हैं। कई राज्यों में इस तरह की प्रथाओं के खिलाफ कानून होने के बावजूद जागरूकता की कमी बनी हुई है।
कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही हत्या के मामलों में गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर अपराध के कारणों को खत्म करने के लिए मजबूत सामाजिक और कानूनी हस्तक्षेप की जरूरत है। पुलिसिंग के साथ-साथ जागरूकता अभियान और विवाद निपटारे की तेज व्यवस्था भी आवश्यक मानी जा रही है।

