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अभय तिवारी के खाते में तीन साल में जमा हुए 1.21 करोड़ से अधिक, CID ने आय से ज्यादा राशि होने का किया दावा

अभय तिवारी के खाते में तीन साल में जमा हुए 1.21 करोड़ से अधिक, CID ने आय से ज्यादा राशि होने का किया दावा

14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली के मामले की जांच के दौरान CID ने अभय तिवारी के बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, उनके ईसीएएफ खाते में वर्ष 2024 से 19 जुलाई 2026 तक कुल 1 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक जमा हुए। CID का कहना है कि यह राशि अभय तिवारी के ज्ञात आय के स्रोतों से काफी अधिक है।

तीन साल में खाते में जमा हुए 1.21 करोड़ से अधिक

CID की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी के ईसीएएफ खाते में वर्ष 2024 के दौरान 19.96 लाख रुपये जमा हुए थे। इसके बाद वर्ष 2025 में खाते में जमा होने वाली राशि बढ़कर 81.49 लाख रुपये से अधिक हो गई। वहीं, वर्ष 2026 में 19 जुलाई तक खाते में 19.73 लाख रुपये से ज्यादा जमा किए गए।

इस तरह तीन वर्षों के दौरान खाते में कुल जमा राशि 1 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। जांच एजेंसी ने इस रकम को उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में काफी ज्यादा बताया है।

JPSC पीटी परीक्षा के दौरान भी जमा हुई रकम

CID के मुताबिक, खाते में जमा हुई रकम का संबंध मुख्य रूप से एसीएफ, एफआरओ और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के समय से जुड़ा हुआ बताया गया है। जांच एजेंसी इन लेन-देन और परीक्षा से जुड़े संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है।

जांच का मुख्य पहलू यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और किन परिस्थितियों में खाते में जमा की गई। इसके लिए खाते में हुए लेन-देन और संबंधित समयावधि की जांच की जा रही है।

कथित परीक्षा धांधली मामले में वित्तीय लेन-देन की जांच

14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली के मामले में CID पहले ही विशेष अदालत में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत 10 आरोपियों को शामिल किया गया है। इन सभी को जांच एजेंसी ने अगस्त में गिरफ्तार किया था।

अब अभय तिवारी के खाते में जमा हुई रकम का विवरण सामने आने के बाद मामले में वित्तीय लेन-देन भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है। हालांकि, खाते में जमा राशि और कथित परीक्षा धांधली के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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