झारखंड में बिना एनओसी नहीं चलेंगी मीट-मछली की दुकानें, नगर निकायों से अनुमति लेना होगा जरूरी
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में अब मीट-मछली की दुकानें चलाने के नियम सख्त होने जा रहे हैं। धनबाद समेत राज्य के सभी शहरी नगर निकाय क्षेत्रों में अब मांस की दुकान, मीट प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज या बिक्री का कारोबार करने के लिए नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा।
नगर निकायों की ओर से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि मांस कारोबार को तय मानकों और नियमों के तहत संचालित किया जा सके। बिना एनओसी के संचालित दुकानों पर कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम से लेनी होगी अनुमति
नई व्यवस्था के तहत कोई भी व्यक्ति यदि मांस या मछली की दुकान खोलना चाहता है तो उसे पहले संबंधित नगर निकाय कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच के बाद ही दुकान संचालन की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा मीट प्रोसेसिंग, मांस रखने के लिए स्टोरेज सेंटर या बड़े स्तर पर बिक्री करने वाले कारोबारियों को भी एनओसी लेना जरूरी होगा। नगर निकाय क्षेत्र में आने वाली सभी ऐसी गतिविधियों को अब अनुमति प्रक्रिया के दायरे में लाया जा रहा है।
नियमों का पालन करना होगा जरूरी
नगर निगम की ओर से एनओसी जारी करने से पहले कई मानकों की जांच की जाएगी। इसमें दुकान का स्थान, साफ-सफाई की व्यवस्था, कचरा निस्तारण, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े नियमों का पालन शामिल होगा।
नगर निकायों का उद्देश्य है कि शहरों में मांस कारोबार निर्धारित जगहों और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार संचालित हो। इससे अव्यवस्थित दुकानों और गंदगी से जुड़ी शिकायतों पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
बिना अनुमति कारोबार पर कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, जिन दुकानदारों के पास जरूरी अनुमति नहीं होगी, उनके खिलाफ नगर निकाय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें नोटिस जारी करने से लेकर दुकान बंद कराने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
धनबाद नगर निगम क्षेत्र में इस नियम को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। निगम प्रशासन अब मीट-मछली कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने और उन्हें नियमों के दायरे में लाने की दिशा में काम कर रहा है।
कारोबारियों को करना होगा आवेदन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मीट-मछली कारोबारियों को नगर निगम कार्यालय में आवेदन देकर एनओसी प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही वे कानूनी रूप से अपना कारोबार संचालित कर सकेंगे।
नगर निकाय प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी कारोबार को रोकने के लिए नहीं, बल्कि शहर में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और व्यवस्थित बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य नगर निकायों में भी इस व्यवस्था को प्रभावी किया जा सकता है।

